बीते दिनों देश के कई राज्यों में बेमौसम बरसात हुई वहीँ कई जगहों पर ओले भी पड़े जिससे किसान त्राहि त्राहि कर रहे हैं। कई किसानों ने आत्महत्या भी की। खबरों के अनुसार महाराष्ट्र में बारिश की वजह से एक हजार करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान है। पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, गुजरात, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश में भी किसान काफी परेशान हैं। बताया जा रहा है की इस बेमौसम बरसात के कारण देश भर में कुल दस हज़ार करोड़ का नुकसान होने की आशंका है। उत्तर भारत में बेमौसम बरसात से किसानों को भारी नुकसान पहुंचा है। रबी की फसलों की पैदावार पर सबसे ज्यादा असर पड़ा है। खेत में तैयार खड़ी फसल जैसे गेहूं, सरसों, आलू, पोश्ता आदि फसलें तबाह हो गईं। तबाह होने से किसान बर्बादी के कगार पर आ पहुंचा है। वहीँ उत्तर प्रदेश में हुई जोरदार बारिश के साथ ओला गिरने से गेहूं की फसल को व्यापक नुकसान हुआ है। प्रदेश में गेहूं के कुल रकबे की करीब 50 फीसद फसल को बारिश व तेज हवाओं ने सुला दिया। इस बार उम्मीद थी की पैदावार अच्छी होगी लेकिन मौसम की मार ने किसानों की उम्मीदों पर पानी फिर दिया है जिसकी भरपाई नहीं हो सकती लेकिन सरकार यदि चाहे तो किसानों पर से इस बोझ को कम किया जा सकता है जैसा की 2008 में सरकार ने बजट के दौरान किसानों के सारे क़र्ज़ माफ़ करने की घोषणा की थी और आयकर में भी छुट दी थी। मौजूदा फसल बिमा के जो नॉर्म्स हैं की 70% से ज्यादा फसल बर्बाद हो तो मुआवजा मिलता है इस धारा को ख़त्म किया जाये और किसानों का जो क़र्ज़ है उसे अविलम्ब माफ़ किया जाये साथ ही सरकार बैंकों को हिदायत दे की किसानों से ऋण के बारे कुछ न कहें।
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