Monday, 12 January 2015

राहुल यादव को शुभकामनाएं



देश के युवा को राजनीति में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेना चाहिए। राहुल को उनके बेहतर भविष्य के लिए शुभकामनाएं। मुझे पूरी उम्मीद है कि वह अपनी जिम्मेदारी निष्ठा और सजगता के साथ निभाएंगे... देश के युवा बंधुओं से अपील है कि आप भी देश निर्माण में आगे आएं, कदम बढ़ाएं...

Saturday, 10 January 2015

जनता पर महंगाई की मार: अब टीवी, फ्रिज और ए.सी आदि महंगे हुए

       
आज देश में कंपनियां मनमानी पर उतारू  हैं। इसी मनमानी का नतीजा है कि कई कंज्यूमर ड्यूरेबल्स कंपनियों ने अपने प्रोडक्ट्स के दाम 5 फीसदी तक बढ़ा दिए हैं। अब टीवी, फ्रिज या फिर ए.सी खरीदने से पहले जनता को सोचना पड़ेगा। यह सरासर गलत और निंदनीय है। इन कंपनियों ने एक्साइज ड्यूटी और उत्पादन लागत में बढ़ोतरी का जो हवाला देते हुए कीमतों में वृद्धि की है, उस पर सरकार को पहल करनी चाहिए। एक्साइज ड्यूटी और उत्पादन लागत में बढ़ोतरी का बोझ उपभोगताओं पर क्यों पड़े? इस बढ़ोतरी का सबसे बड़ा कारण था कि सरकार ने एक्साइज ड्यूटी पर मिल रही छूट को आगे बढ़ाने से इनकार किया, जिसके बाद कंपनियों ने ऐसा फैसला लिया है। कमज़ोर रुपए का होना भी इसका बड़ा कारण है। लेकिन मेरा एक ही मानना है कि किसी भी सूरत में जनता पर कोई बोझ नहीं पड़ना चाहिए। सरकार को चाहिए कि अविलंब इस पर पहल करे और ऐसी मनमानी पर अंकुश लगाए।
          मुझे एक और बात भी पता लगी है कि जैसे कोई उपभोगता एक नया मोबाइल फ़ोन इंस्ट्रूमेंट खरीदता है 13,000 रूपए में उसी इंस्ट्रूमेंट को वही कंपनी एक दिन के बाद 7,000 या 8,000 रूपए में बेचती है। मेरा मानना है कि फ़ास्ट कंज्यूमर गुड्स के ऊपर भी सरकार का नियंत्रण होना चाहिए जिससे कि उपभोगता खुद को लुटा हुआ महसूस न करें और ये सुनिश्चित किया जाये कि उनके साथ कभी भी गुड्स और प्रोडक्ट्स के मामले में किसी प्रकार की धांधली नहीं हो।  इसी प्रकार मैं ये भी मानता हूँ कि देश में युवाओं को इन्टरनेट की सुविधा उचित दरों पर मिलनी चाहिए क्योंकि आज देश के युवा इन्टरनेट पर काफी निर्भर हैं.


Friday, 9 January 2015

केंद्र की योजना जनता पर पड़ सकती है भारी


मुझे इस बात का डर है कि केंद्र की योजना कहीं जनता पर भारी न पड़ जाए। उद्योग संघ पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एवं उद्योग और क्रिसिल रेटिग ने एक शोध-पत्र जारी किया है। कहा गया है कि 'मेक इन इंडिया' परियोजना को बढ़ावा देने और 7-8 फीसदी विकास दर हासिल करने के लिए आने वाले पांच सालों के दौरान भारत को अपनी सभी इन्फ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में 26 हजार अरब रुपये की आवश्यकता होगी।
यह  इसलिए है क्योंकि आज भी देश की गरीब जनता अपनी मूलभूत समस्याओं से जूझ रही है। गांवों के इस देश में गरीब जनता के लिए सबसे पहले भोजन, वस्त्र और आवास की व्यवस्था की जानी चाहिए। यहां देश परेशानियों से जूझ रहा है और इस सरकार के नुमाइंदे हजारों-अरबों रुपए को शहरीकरण जैसी योजनाओं पर खर्च करने की बात कर रहे हैं, यह ठीक नहीं है। शहरीकरण भी जरूरी है, वो तब है जब देश की आम जनता को मुलभुत सुविधाएं मुहय्या हों।  सरकार जिस भी योजना को लाए, लेकिन जनता पर इसका बोझ कतई नहीं पड़ना चाहिए। 

बेरोजगारी दर बढ़कर 4.9 प्रतिशत

युवाओं की हमें अब इस बात को लेकर गहरी चिंता हो रही है कि हमारे युवा साथियों को रोज़गार का अवसर नहीं मिल पा रहा है। 2०14 लोकसभा चुनाव के दौरान इसी भाजपा ने 2 करोड़ हाथो को रोजगार देने का वादा किया था, लेकिन आज इसी भाजपा सरकार ने स्वीकार कर लिया है कि देश में बेरोज़गारी दर बढ़ गई है। श्रम मंत्रालय ने भारत में बेरोजगारी की दर का अध्ययन किया है। मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक पिछले वित्तीय वर्ष में बेरोजगारी की  दर बढ़कर 4.9 प्रतिशत पहुंच गई है। श्रम मंत्रालय की इकाई श्रम ब्यूरो द्वारा जारी ताजा सर्वेक्षण रिपोर्ट में कहा गया है कि बीते वित्त वर्ष में अखिल भारतीय स्तर पर बेरोज़गारी की दर बढ़कर 4.9 प्रतिशत पर पहुंच गयी है जो 2०12-13 में 4.7 प्रतिशत थी। पुरुषों में बेरोजगारी की दर 2०13-14 में बढ़कर 4.1 प्रतिशत पहुंच गयी जो 2०12-13 में 4 प्रतिशत थी। वहीं महिलाओं में बेरोजगारी की दर बढकर 7.7 प्रतिशत पहुंच गयी जो 2०12-13 में 7.2 प्रतिशत थी।

ये आंकड़े अपने आप में बताने के लिए काफी है कि भाजपा ने चुनाव के दरम्यान जितने वादे किए थे, उसे पूरा कर पाने में यह सरकार पूरी तरह से विफल रही है। 

Thursday, 8 January 2015

जमीनी हकीकत से नावाकिफ है सरकार

देश में `मेक इन इंडिया' कैसे होगा साकार, जब सरकार को जमीनी स्तर का पता ही नहीं है? केवल बातों में `मेक इन इंडिया’ का गीत गाने से क्या होगा। क्या सरकार ने कभी यह जानने की कोशिश की कि मैनुफैक्चरिग सेक्टर्स की हालत आज क्या हो गई है। विश्व की थर्ड लारजेस्ट पीसी मेकर कंपनी 'डेल’ देश में मैनुफैक्टरिग क्षमता को लेकर संघर्ष के दौर से गुजर रही है। यही नहीं, 'एसर’ भी व्यापार का अनुकूल माहौल न होने की वजह से आज देश में इलेक्ट्रॉनिक प्रोडक्ड्स का विस्तार करने से हिचक रही है। केवल यही नहीं हैं। देश में ऐसी हज़ारों कंपनियां हैं जो आज आखिरी सांस गिन रही हैं। `मेक इन इंडिया' का केवल प्रचार करने से पहले सरकार को इन पर भी तो सोचना चाहिए था। यह भी हकीकत है कि खराब नीतियों के कारण जीडीपी का वो ग्रोथ नहीं हो रहा है, जो सरकार ने वादे किए थे। पिछले वर्ष सरकार के चार माह पूरा करने के बावजूद फैक्ट्री का उत्पादन .1 फीसदी रहा, जो पहले 3.5 फीसदी हुआ करता था।
भारत में मैनुफैक्चरिग की राह में सबसे बड़ी समस्या है- बिजली की किल्लत और इसकी अधिक कीमत का होना। इसके आर्थिक मामलों में जहां अन्य देशों में 2-4 फीसदी ब्याज है, वहीं हमारे देश में यह 15 फीसदी है। इन परेशानियों के कारण भारत में मैनुफैक्चरिग 2० फीसदी हमेशा से कम होता रहा है। सरकार को चाहिए कि इस पर ध्यान दें और `मेक इन इंडिया' का ढोल पीटने से पहले यहां की समस्याओं पर गौर करें।
 

पढ़ें, अखबारों में सरकार के कदमों का विरोध

Economic Times 08-01-2015
Times Of India 08-01-2015
CityTimes Dainik 08-01-2015
SunStar Dainik 08-01-2015
Indian Express 08-01-2015

Hindustan Dainik 08-01-2015