Wednesday, 4 March 2015

बदहाल किसानों को दिया जाये उचित मुआवजा, कर्ज माफ़ हो


बीते दिनों देश के कई राज्यों में बेमौसम बरसात हुई वहीँ कई जगहों पर ओले भी पड़े जिससे किसान त्राहि त्राहि कर रहे हैं। कई किसानों ने आत्महत्या भी की। खबरों के अनुसार महाराष्ट्र में बारिश की वजह से एक हजार करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान है। पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, गुजरात, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश में भी किसान काफी परेशान हैं। बताया जा रहा है की इस बेमौसम बरसात के कारण देश भर में कुल दस हज़ार करोड़ का नुकसान होने की आशंका है।  उत्तर भारत में बेमौसम बरसात से किसानों को भारी नुकसान पहुंचा है। रबी की फसलों की पैदावार पर सबसे ज्यादा असर पड़ा है। खेत में तैयार खड़ी फसल जैसे गेहूं, सरसों, आलू, पोश्ता आदि फसलें तबाह हो गईं।  तबाह होने से किसान बर्बादी के कगार पर आ पहुंचा है। वहीँ उत्तर प्रदेश में हुई जोरदार बारिश के साथ ओला गिरने से गेहूं की फसल को व्यापक नुकसान हुआ है। प्रदेश में गेहूं के कुल रकबे की करीब 50 फीसद फसल को बारिश व तेज हवाओं ने सुला दिया। इस बार उम्मीद थी की पैदावार अच्छी होगी लेकिन मौसम की मार ने किसानों की उम्मीदों पर पानी फिर दिया है जिसकी भरपाई नहीं हो सकती लेकिन सरकार यदि चाहे तो किसानों पर से इस बोझ को कम किया जा सकता है जैसा की 2008 में सरकार ने बजट के दौरान किसानों के सारे क़र्ज़ माफ़ करने की घोषणा की थी और आयकर में भी छुट दी थी। मौजूदा फसल बिमा के जो नॉर्म्स हैं की 70% से ज्यादा फसल बर्बाद हो तो मुआवजा मिलता है इस धारा को  ख़त्म किया जाये और किसानों का जो क़र्ज़ है उसे अविलम्ब माफ़ किया जाये साथ ही सरकार बैंकों को हिदायत दे की किसानों से ऋण के बारे कुछ न कहें।


Saturday, 28 February 2015

इस बजट से बढ़ेगी महंगाई

केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली द्वारा पेश वित्तीय वर्ष 2०15-16 के आम बजट से देश की आम जनता को निराशा ही हाथ लगी है। बजट में एक तो इनकम टैक्स छूट में कोई बदलाव नहीं किया गया है, जिससे आम जनता को कोई राहत नहीं मिली है। वहीं कॉरपोरेट को लुभाने के लिए पहल जरूर की गई है। निस्संदेह इस बजट में न तो किसानों के लिए कुछ विशेष है, न तो बेरोज़गारी को कम करने के लिए कोई ठोस कदम उठाया गया है। सर्विस कर, कस्टम कर बढ़ाने से महंगाई बढ़ेगी जो कतई उचित नहीं है। ये बजट गरीब और आम आदमी की आकांक्षाओं के अनुरूप नहीं है। बजट देश की आम जनता के हिसाब से सोचकर पेश नहीं किया गया है। ज्यादा निवेश करने पर कर में छूट मिलेगी, इससे तो यही लगता है कि ये बजट कॉर्पोरेट के हित के लिए है। इसके अलावा मोबाइल, इंटरनेट, कूरियर जैसी कई जरूरी चीजों की कीमतों में बढ़ोतरी भी हो सकती है। 

Thursday, 26 February 2015

रेल बजट में माल भाड़े में बढ़ोतरी से बढ़ेगी महंगाई


रेल मंत्री सुरेश प्रभु द्बारा पेश रेल बजट में माल भाड़े में जिस तरह 1० फीसदी की बढ़ोतरी की गई है, उससे महंगाई बढ़ सकती है। कोयला, सीमेंट, आयरन और स्टील के माल भाड़े में बढ़ोतरी से इनके दाम बढ़ सकते हैं। वहीं, एलपीजी के माल भाड़े में ०.8 फीसदी की, कोयले के मालभाड़े में 6.3 फीसदी, केरोसीन के मालभाड़े में ०.8 फीसदी, स्क्रैप और पिग ऑयरन के मालभाड़े में 3.1 फीसदी, यूरिया के मालभाड़े में 1० फीसदी, सीमेंट के मालभाड़े में 2.7 फीसदी, स्लैग के मालभाड़े में 2.7 फीसदी, अनाज और दालों के मालभाड़े में 1० फीसदी की और ऑयरन-स्टील के मालभाड़े में ०.8 फीसदी की बढ़ोतरी की गई हैं। इन उत्पादों के मालभाड़े में अभी इस तरह बढ़ोतरी नहीं होनी चाहिए थी, क्योंकि जनता पहले से ही महंगाई से त्रस्त रही है। 

25/02/2015 : Shri Sharad Yadav on the issue of caste & religion

25/02/2015 : Shri Sharad Yadav on the issue of economic crisis