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Wednesday, 4 February 2015

गरीबों व आम जनता के साथ अन्याय कर रही ये सरकार

‘इंडियन एक्सप्रेस’ न्यूज़पेपर में मनरेगा पर छपी एक रिपोर्ट से काफी दुख हुआ। केंद्र सरकार की ओर से इस योजना के प्रति राजनीतिक जोड़-तोड़ दिखाकर अनदेखी करना, गरीबों के साथ घोर अन्याय है। राजनीति करना, शासन चलाना तो अच्छी बात है, लेकिन ये सारी चीजें तब और अच्छी लगती हैं, जब हम गरीब, आम जनता और देश का भला सोचकर करते हैं। ऐसी राजनीति को विनाशक ही माना जाए, जिसमें गरीबों के साथ छल हो, धोखा हो। पूर्ववर्ती सरकार में ‘100 दिन रोज़गार’ के मद्देनज़र जो योजना चल रही थी, मौजूदा केंद्र सरकार ने उसे केवल तीन फीसदी लोगों को लाभ देकर ही समेट दिया है। यह गरीब और बेरोज़गार के साथ धोखा नहीं तो और क्या है? आप चुनाव में बड़े-बड़े वादे करते हैं और धरातल पर देश की जनता को इस तरह की पीड़ा देते हैं। मैं इसकी निंदा करता हूं। आप भी पढ़िए इस पूरी रिपोर्ट को...

Thursday, 29 January 2015

70 फीसदी से अधिक नरेगा मजदूरी बकाया, अविलंब भुगतान करे सरकार

हाल में ग्रामीण विकास मंत्रालय की ओर से एक आंकड़ा आया है जिसमें बताया गया है कि एनडीए सरकार के शासनकाल में इस वित्तीय वर्ष के दौरान 70 फीसदी से अधिक नरेगा मजदूरी का भुगतान नहीं हुआ है। इसी महीने ग्रामीण विकास मंत्रालय द्बारा इस योजना की एक आंतरिक समीक्षा बैठक के पहले पेश किए गए एक आंकड़े के अनुसार, निर्धारित की गई रकम से केवल 28.22 फीसदी ही भुगतान हुआ। वहीं मंत्रालय की लापरवाही की वजह से 15 दिसंबर 2014 तक यह आंकड़ा 72 फीसदी तक पहुंच गया। रिपोर्ट में तो यह भी बताया गया है कि 90 दिनों के बाद करीब 9 फीसदी का ही भुगतान हुआ। केंद्र सरकार को मजदूरों के साथ कम से कम इस तरह का व्यवहार नहीं करना चाहिए। मनरेगा के अंतर्गत जो वर्ष में 100 दिन रोजगार का वादा किया गया था, उसके साथ किसी तरह की अनदेखी इस देश की गरीब जनता के साथ धोखा है। इसे देखकर यह लगता है कि यह सरकार गरीबों की हितैषी है ही नहीं।