हाल में ग्रामीण विकास मंत्रालय की ओर
से एक आंकड़ा आया है जिसमें बताया गया है कि एनडीए सरकार के शासनकाल में इस वित्तीय
वर्ष के दौरान 70 फीसदी से अधिक नरेगा मजदूरी का
भुगतान नहीं हुआ है। इसी महीने ग्रामीण विकास मंत्रालय
द्बारा इस योजना की एक आंतरिक समीक्षा बैठक के पहले पेश किए गए एक आंकड़े के अनुसार, निर्धारित की गई
रकम से केवल 28.22 फीसदी ही भुगतान हुआ। वहीं मंत्रालय
की लापरवाही की वजह से 15
दिसंबर 2014 तक यह आंकड़ा 72 फीसदी तक पहुंच
गया। रिपोर्ट में तो यह भी बताया गया है कि 90 दिनों के बाद करीब
9 फीसदी का ही भुगतान हुआ। केंद्र सरकार को मजदूरों के साथ कम से
कम इस तरह का व्यवहार नहीं करना चाहिए। मनरेगा के अंतर्गत जो वर्ष में 100 दिन रोजगार का वादा किया गया था, उसके साथ किसी तरह
की अनदेखी इस देश की गरीब जनता के साथ धोखा है। इसे देखकर यह लगता है कि यह सरकार
गरीबों की हितैषी है ही नहीं।

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