पूर्व सीएम नीतीश कुमार की संपर्क यात्रा को लेकर जदयू के राष्ट्री अध्यक्ष शरद यादव ने कहा कि लोकसभा चुनाव में भले ही नाव डूब गयी, पर उसे चलानेवाले नहीं डूबे हैं। कहा कि हम फिर उभर कर सामने आयेंगे। शरद यादव से सीएम जीतन राम मांझी मिले। कई मंत्रियों से मिल कर सरकार का फीडबैक भी लिया। श्री यादव ने पार्टी के लोगों को उत्साहित करते हुए कहा कि हम विषम परिस्थितियों में फिर से उभर कर आयेंगे। लोकसभा चुनाव में नाव डूबी है, चलानेवाले नहीं डूबे हैं। इसके पहले भी हमलोग विषम परिस्थितियों से लड़ कर बाहर निकले हैं। जाहिर है, शरद यादव जी का राजनीतिक करियर काफी अनुभवों से भरा रहा है। उन्होंने ढेरों सरकारों को बनते और बिगड़ते देखा। आज के राजनीतिक परिदृश्य से दुखी श्री यादव कहते हैं कि नेताओं पर से जनता का विश्वास उठते जा रहा है क्योंकि यहां बातें ज्यादा और धरातल स्तर पर काम कम हो रही है।
Saturday, 29 November 2014
जदयू अध्यक्ष शरद यादव ने दी मांझी को सलाह
जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद यादव देश की राजनीति के ऐसे स्तंभ हैं जिन्होंने ढेरों उताव-चढ़ाव देखे हैं। किसी दल को संगठित करना और उसकी एकरूपता को बनाना कोई उनसे सीखे। हाल में ऊंची जातियों के लोगों के विदेशी होने संबंधी बिहार के मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी के बयान को लेकर सत्तारुढ़ जनतादल यूनाइटेड (जदयू) में विरोध के स्वर आज तेज हो गये तथा एक और विधायक ने उन्हें मुख्यमंत्री के पद से हटाने की मांग की।
मोकामा के जदयू विधायक अनंत सिह द्बारा मांझी को हटाने की मांग किये जाने के एक दिन बाद आज भोजपुर जिले के तराई से अन्य पार्टी विधायक सुनील पांडे ने मुख्यमंत्री की टिप्पणी का कड़ा विरोध किया और तत्काल उन्हें मुख्यमंत्री के पद से हटाने की मांग की।
लेकिन जदयू के राष्ट्रीय नेतृत्व ने सीएम श्री मांझी के बयान को लेकर नाखुशी जताई और सलाह स्वरूप संवाद दिया कि मांझी को बिहार के विकास संबंधी नीतीश कुमार के रोडमैप को आगे ले जाने के लिए चुना गया था। इसलिए बेहतर हो कि वह बयानबाजी में पड़ने के बजाय बिहार में विकास को तवज्जो दें और एक मिसाल कायम करें।
नरेंद्र मोदी सरकार 'देसी' सपने विदेशी मार्ग से बेच रही है : शरद यादव
जेडीयू के अध्यक्ष शरद यादव ने भाजपा नीत एनडीए सरकार की मुख्य क्षेत्रों में विदेशी निवेश आकर्षित करने के लिए आलोचना की और कहा कि इस सरकार और कांग्रेस नीत पिछली यूपीए सरकार में कोई अंतर नहीं है। उन्होंने नरेंद्र मोदी सरकार पर आरोप लगाया कि वह रक्षा, रेलवे और बीमा जैसे क्षेत्रों में एफडीआई के माध्यम से लोगों को सपने बेच रही है और इस एजेंडे को यूपीए सरकार ने भी असफल रूप से पेश किया था।
शरद यादव ने नागपुर में संवाददाताओं से कहा, एनडीए सरकार रक्षा, रेलवे और बीमा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों के माध्यम से एफडीआई बेच रही है, जिसे कांग्रेस नीत यूपीए सरकार नहीं कर पाई। बता दें कि आज देश में जिस निराशा का माहौल है, उससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि नरेंद्र मोदी ने किस हवा-हवाई में वादों का पुल बना दिया और जब वे पूरे नहीं हो रहे हैं तो उसके लिए आश्वासन और बहाने तलाश रहे हैं।
2०19 में किस आधार पर मांगेंगे वोट
जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद यादव का मानना है कि कोई भी सरकार बनती है जनता के विश्वास के बाद। लेकिन अक्सर ये देखा जाता है कि सरकार बनने के बाद जनता से किए वादों को अक्सर भुला दिया जाता है। श्री यादव कहते हैं कि मोदी सरकार ने जो झूठे वादे कर देश का भरोसा तोड़ा है, इसका जवाब उन्हें 2०19 के चुनाव में देना है।
महामोर्चा का रूप इसलिए तय किया जा रहा है ताकि देश की जनता के पक्ष में न्यायस्वरूप सड़क पर उतरा जा सके। इसके लिए दूसरी पार्टियों से भी बात होगी। श्री यादव बताते हैं कि लोकसभा चुनाव में बीजेपी पर जनता का अटूट विश्वास सामने आया था।
जनमत भी उन्हें बहुत शानदार मिले। लेकिन अब उनकी जनता की समस्याओं के प्रति लापरवाही ने गैर-बीजेपी दलों का गठबंधन बनाने को मजबूर कर दिया है। देश की जनता इन मुद्दों को लेकर हमारे साथ आएं।
जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद यादव होंगे सम्मानित
पटना। जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष व राज्यसभा सांसद शरद यादव को 2014 का बेस्ट पार्लियामेंट्री अवार्ड मिलने के बाद अब जदयू उन्हें सम्मानित करेगा। दिसंबर में पटना के कृष्ण मेमोरियल हॉल में सम्मान समारोह होगा। जानकारी जदयू के वरिष्ठ नेता व शिक्षा मंत्री वृशिण पटेल ने दी।
विभागीय कार्यालय में उन्होंने बताया कि शरद यादव को सम्मानित करने के लिए जदयू के प्रदेश अध्यक्ष से बातचीत हो चुकी है और उन्होंने भी सहमति दी है। समारोह नीतीश कुमार की संपर्क यात्रा के बाद रखा जायेगा. बिहार में महागंठबंधन का स्वरूप आया है।
समारोह में जदयू के साथ राजद व कांग्रेस नेताओं के आने से महागंठबंधन को और गति मिलेगी। समारोह में शामिल होने के लिए महागंठबंधन के नेताओं को भी बुलाया जायेगा। इसमें राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद, राबड़ी देवी, कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी, राहुल गांधी समेत प्रदेश के राजद-कांग्रेस नेताओं को जदयू की ओर से निमंत्रण भेजा जायेगा।
हर वर्ग के मसीहा हैं शरद यादव
जनता दल (यूनाईटेड) के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री शरद यादव ने राजनीति की उस उठापटक को देखी हैं, जहां से आज
के नेता केवल वोटबैंक के लिए सपने दिखाने वाली बयानबाजी करते हैं तो सब आइने की तरह स्पष्ट दिखाई देता
है। श्री यादव की छवि ऐसे बेबाक नेताओं में शुमार होती है जो हर गलत पर आवाज़ उठाने में नहीं चूकते, वो चाहे
अपनी ही पार्टी का मामला क्यों न हो। श्री यादव हमेशा से एकजुटता में विश्वास करते हैं। उनकी मानें तो जब तक
देश की जनता गलत पर एक साथ नहीं होगी, तब तक इस देश का कल्याणा संभव नहीं है। हाल में मेरठ में
किसानों की रैली भी इसका जीता-जागता परिणाम है। उन्होंने देश के अलग-अलग राजनीतिक दलों से आह्वान
किया कि देश की भलाई के लिए सब एक मंच पर आ जाएं। सचमुच, आज के राजनीतिक हालात में इस तरह का
सोच रखने वाला नेता बमुश्किल ही है। खैर, श्री शरद यादव लखनऊ में सपा के राष्ट्रीय अधिवेशन में भी शामिल हुए
और मेरठ में दिग्गज नेताओं को भी एकजुट करने में काफी सफल रहे। आइए, अब हम आप उनकी एकजुटता में
अपना हाथ बढ़ाएं। सत्य पथ पर चलते हुए वैचारिक क्रांति लाएं। ऐसे नेता का साथ दें जो देश को एक नई राह
प्रदान करना चाहते हैं। संकल्प लीजिए कि साथ चलेंगे। जय हिन्द।
के नेता केवल वोटबैंक के लिए सपने दिखाने वाली बयानबाजी करते हैं तो सब आइने की तरह स्पष्ट दिखाई देता
है। श्री यादव की छवि ऐसे बेबाक नेताओं में शुमार होती है जो हर गलत पर आवाज़ उठाने में नहीं चूकते, वो चाहे
अपनी ही पार्टी का मामला क्यों न हो। श्री यादव हमेशा से एकजुटता में विश्वास करते हैं। उनकी मानें तो जब तक
देश की जनता गलत पर एक साथ नहीं होगी, तब तक इस देश का कल्याणा संभव नहीं है। हाल में मेरठ में
किसानों की रैली भी इसका जीता-जागता परिणाम है। उन्होंने देश के अलग-अलग राजनीतिक दलों से आह्वान
किया कि देश की भलाई के लिए सब एक मंच पर आ जाएं। सचमुच, आज के राजनीतिक हालात में इस तरह का
सोच रखने वाला नेता बमुश्किल ही है। खैर, श्री शरद यादव लखनऊ में सपा के राष्ट्रीय अधिवेशन में भी शामिल हुए
और मेरठ में दिग्गज नेताओं को भी एकजुट करने में काफी सफल रहे। आइए, अब हम आप उनकी एकजुटता में
अपना हाथ बढ़ाएं। सत्य पथ पर चलते हुए वैचारिक क्रांति लाएं। ऐसे नेता का साथ दें जो देश को एक नई राह
प्रदान करना चाहते हैं। संकल्प लीजिए कि साथ चलेंगे। जय हिन्द।
बिहार सरकार की बड़ी उपलब्धि: 8०० साल बाद नालंदा विश्वविद्यालय में पढ़ाई फिर शुरू
कभी पूरी दुनिया में शिक्षा और ज्ञान के केंद्र के रूप में परचम लहराने वाला बिहार का नालंदा विश्वविद्यालय एक बार फिर इतिहास
दोहराने जा रहा है। 8०० साल बाद आज से इस विश्वविद्यालय में फिर क्लास शुरू हुई। एक सितंबर 2०14 को प्राचीन और आधुनिक
भारत के इतिहास के बीच ज्ञान की कड़ी जुड़ी. लगभग 8०० साल बाद नालंदा विश्वविद्यालय (एनयू) के पुनर्जन्म से यह संभव हो
सका है। बिहार की राजधानी पटना से करीब 12० किलोमीटर दक्षिण- उत्तर में राजगीर शहर के अस्थाई विश्वविद्यालय परिसर के
सभागार में कुलपति प्रोççफ़ेसर गोपा सभरवाल बताते हैं कि छात्रों की संख्या कम ज़रूर है, लेकिन क्योंकि इसे एक शोध संस्थान के रूप में
विकसित किया जा रहा है, लिहाजा यहाँ अन्य संस्थानों की तरह भीड़ की उम्मीद नहीं की जानी चाहिए। 2०14-15 के पहले सत्र के
लिए जापान और भूटान के एक-एक छात्र और भारत के विभिन्न राज्यों के 13 छात्र-छात्राओं ने नामांकन कराया है। शिक्षण शुल्क
तीन लाख रुपये सालाना है, लेकिन वर्तमान बैच को फीस में 5० प्रतिशत की छूट दी गई है।
जदयू नेतृत्व में बिहार सरकार अंतर्गत जानिए ग्रामीण निर्माण विभाग की प्रमुख योजनाएं
जानिए ग्रामीण निर्माण विभाग, बिहार की योजनाएं और कार्यक्रम
योजनाएं
प्रमुख कनेक्टिविटी कार्यक्रम:
राज्य योजना, 4515 (एमएनपी) - नई सड़क और पुल
नाबार्ड वित्त पोषित ग्रामीण अवसंरचना विकास निधि (आरआईडीएफ)
मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना
विशेष घटक योजना (अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति के लिए)
सीमा क्षेत्र विकास कार्यक्रम (उइकघ्)
आप की सरकार आप के द्बार
गैर योजना प्रमुख, 3०54
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना
राज्य योजना (सड़क और पुल) +४५१५
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई)
मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना (MMक्वSड्ढ)
आप की सरकार आप के द्बार
नाबार्ड वित्त पोषित ग्रामीण अवसंरचना विकास निधि (आरआईडीएफ)
सीमा क्षेत्र विकास कार्यक्रम (उइकघ्)
(12 वें वित्त आयोग) गैर योजना - ३०५४
राष्ट्रीय सम विकास योजना (टSठ्ठड्ढ)
विशेष घटक कार्यक्रम (एससीपी)
मुख्यमंत्री जिला विकास योजना (MMZठ्ठड्ढ)
विधायक / विधान परिषद के सदस्य योजनाएं
सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास (एमपीएलएडी)
बिहार सरकार के दिन ब दिन बढ़ते कदम
बिहार सरकार ने विगत वर्षों में राज्य के विकास को एक नई ऊंचाई दी है। जनता इन विकास के पैमाने को
जन-जन तक पहुंचाएं। जनता जनार्दन है। वो सर्वोपरी है। इसलिए जन को इसकी जानकारी होनी चाहिए कि
उनके द्बारा चुनी गई सरकार ने राज्य को विकास के नए ओहदे पर ला खड़ा किया है। अब आगे भी इस विकास के
रथ को कायम रखना है।
नीचे दिए लिक को क्लिक कर विकास की तमाम रूपरेखा से अवगत हों:
http://gov.bih.nic.in/Magazine/Bihar-Progress-Report-2013-(English).pdf
मीडिया ने भी समाज कल्याण विभाग की उपलब्धियों को बखूबी सराहा
विपक्षियों के लिए यह भले ही न पचने वाली बात हो, लेकिन ये सच है कि बिहार सरकार ने राज्य में दिन दूनी, राच चौगुनी तरक्की की है। मीडिया ने समय समय पर बिहार सरकार अंतर्गत विभागों के कार्यों की सराहना की है। समाज के असुरक्षित तबकों के कल्याण और सशक्तीकरण में सक्रिय भूमिका निभाने के कारण समाज कल्याण विभाग अक्सर ही खबरों में रहता है। इसके अलावा उसके अनेक कार्यक्रमों और योजनाओं तथा साथ ही नीति और संस्थागत घोषणाओं और हस्तक्षेपों का भी पर्याप्त कवरेज किया जाता है। मीडिया में प्रकाशित कुछ खबरों को हम आपके सामने पेश कर रहे हैं।
समाचार पत्र से
समाज कल्याण विभाग अंतर्गत बिहार सरकार द्वारा जनहित में किए विकास का छोटा सा नमूना
बहुतों के मन में सवाल है कि बिहार सरकार ने अब तक क्या किया ? समाज कल्याण विभाग का एक छोटा सा आंकड़ा पेश है। 2008-09 से सरकार ने जो भी किया, उसका पूरा ब्यौरा पेश है। विरोधियों के लिए यह भले ही मिर्च हो, लेकिन आम जनता लिए यह गर्व की बात है कि उन्होंने एक विकास करने वाली सरकार को चुना था, जिसने अपने आप को साबित किया और आगे भी बिहार को विकास के पथ पर ले जाने का सिलसिला जारी रखेगी।
समाज कल्याण विभाग, बिहार सरकार की वार्षिक रिपोर्ट पारदर्शिता सुनिश्चित करती हैं। इन रिपोर्टों में विभाग के कार्यकलापों तथा संगठनात्मक और कार्यक्रम सम्बन्धित गतिविधियों के बारे में विस्तारपूर्वक विवरण उपलब्ध है।यह रिपोर्ट विभाग के विभिन्न कल्याणकारी कार्यक्रमों, उपलब्धियों, बजट और वास्तविक व्यय, हाल ही में जारी की गई पांच साल की रिपोर्ट कार्ड और वर्ष 2007 में विभाग की स्थापना के बाद से शुरू की गतिविधियों को सारांश में प्रस्तुत कर रही हैं। इन दस्तावेज़ों द्वारा वार्षिक कार्य निष्पादन और बच्चों, महिलाओं, वृद्ध व्यक्तियों, विधवाओं और विकलांग व्यक्तियों की सामाजिक सुरक्षा के समन्वित विकास के लिए उठाए गए कदमों का एक विस्तृत ब्यौरा प्रदान किया जाता है।
वार्षिक रिपोर्ट
कामकाजी/रुग्ण माताओं के बच्चों के लिए विशेष योजना
योजनाएं और कार्यक्रम : बाल संरक्षण
| कामकाजी/रुग्ण माताओं के बच्चों के लिए राजीव गांधी शिशुशाला योजना:कामकाजी/रुग्ण माताओं के बच्चों के लिए राजीव गांधी शिशुशाला योजना का उद्देश्य कामकाजी महिलाओं के बच्चों को देखरेख और सहायता प्रदान करना है। लाभ और पात्रता इस योजना के अंतर्गत 12,000 रु. से कम की मासिक आय वाले परिवारों के 0-6 वर्ष आयु समूह के बच्चे लाभ प्राप्त करने के पात्र हैं। बच्चों को एक सुनिश्चित स्थान प्रदान करने के अलावा, ये शिशुशालाएं पूरक आहार, विद्यालय-पूर्व शिक्षा और आपात्कालीन स्वास्थ्य देखरेख आदि सेवाएं भी प्रदान करती हैं। योजना के अंतर्गत एक शिशुशाला को प्रति माह 3,532 रुपए का अनुदान प्रदान किया जाता है। यह योजना कामकाजी और रुग्ण महिलाओं के बच्चों के लिए शिशुशालाएं स्थापित करने हेतु स्वैच्छिक संस्थाओं को सहायता प्रदान करती है। इसके अंतर्गत स्वैच्छिक संस्था 9 बजे प्रात: से 5.00 बजे सायं तक छह वर्ष से कम आयु के 25 बच्चों के लिए शिशुशाला चला सकती है। |
कामकाजी बच्चों के कल्याण के लिए बिहार सरकार की प्रमुख योजना
योजनाएं और कार्यक्रम : बाल संरक्षण
| कामकाजी बच्चों के कल्याण के लिए योजना: इस योजना का उद्देश्य कामकाजी बच्चों को अनौपचारिक शिक्षा और व्यावसायिक प्रशिक्षण के अवसर प्रदान करना है ताकि अगर उन्होंने विद्यालय में पढ़ाई नहीं की या किन्हीं कारणों से पढ़ाई छोड़नी पड़ी है तो वे मुख्य धारा की शिक्षा में प्रविष्ट/पुन: प्रविष्ट हो सकें। यह शहरी क्षेत्रों में ही परियोजनाओं के लिए सहायता प्रदान करती है और श्रम एवं रोजगार मंत्रालय की वर्तमान योजनाओं के कार्यान्वयन वाले क्षेत्रों में परियोजनाओं के लिए सहायता प्रदान नहीं करती। लाभ और पात्रता यह योजना बाल मजदूरों और संभावित बाल मजदूरों के - विशेषकर उनके जिन्हें पारिवारिक सहायता प्राप्त नहीं है, सहायता प्रदान करती है। इनमें निम्न प्रकार के बच्चे शामिल हैं: झोंपड़पट्टियों के बच्चे/फुटपाथ पर रहने वाले/नशीली दवा लेने वाले, रेलवे प्लेटफॉर्म पर रहने वाले/रेलवे लाइनों के पास रहने वाले, दुकानों, ढाबों, मैकेनिक शॉप्स में काम करने वाले, घरेलू काम करने वाले बच्चे, वे बच्चे जिनके मातापिता जेल में हैं, प्रवासियों/यौन कर्मियों, कुष्ठ रोगियों के बच्चे, आदि। इस कार्यक्रम के घटक इस प्रकार हैं: मुख्य धारा की शिक्षा प्रणाली में वापसी; बच्चों के मातापिता, परिवार के सदस्यों और संबंधियों को परामर्श ताकि उनका शोषण न हो; और जहां भी संभव हो व्यावसायिक प्रशिक्षण। यह योजना को स्वैच्छिक क्षेत्र या गैर-सरकारी संस्थाओं के माध्यम से संचालित किया जाता है। इस हेतु संस्थाओं को वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। योजना के मानदंडों के अनुसार मंत्रालय 90 प्रतिशत वित्ताीय सहायता प्रदान करता है और संबंधित संस्था बाकी 10 प्रतिशत व्यय वहन करती है। |
बिहार सरकार के कार्य का दूसरे राज्य अनुकरण कर रहे हैं, बाल संरक्षण पर बड़ा कदम
योजनाएं और कार्यक्रम : बाल संरक्षण
| मुख्य मंत्री कन्या विवाह योजना: इस योजना का उद्देश्य विवाह के समय बालिका के परिवार को वित्ताीय सहायता प्रदान करना, विवाह का पंजीकरण कराने हेतु प्रोत्साहित करना, और बाल विवाह पर रोक लगाना है। यह योजना महिला विकास निगम द्वारा कार्यान्वित की जा रही है। कार्यान्वयन स्थिति31 मार्च, 2011 तक 85,000 लड़कियों को 5,192 लाख रुपए की राशि संवितरित की जा चुकी है। वित्ता वर्ष 2010-11 के बजट में इस योजना के लिए 8,000 लाख रुपए का बजट-आवंटन किया गया है; उद्देश्य 2010-11 के दौरान 158,400 लड़कियों को लाभ प्रदान करना है। लाभ और पात्रता इस योजना के अंतर्गत निर्धनता रेखा से नीचे के परिवारों और 60,000 रु. प्रति वर्ष से निम्न आय वाले परिवारों की लड़कियों को विवाह के समय 5000 रु. की प्रोत्साहन राशि दी जाती है। एकबारगी दी गई यह नकद सहायता लड़की के विवाह योग्य आयु का होने पर दी जाती है। इस योजना का उद्देश्य दहेज प्रथा पर रोक लगाना भी है। कैसे प्राप्त करें इस योजना के लाभ प्राप्त करने के लिए लाभार्थी को प्रखंड विकास अधिकारी के पास आवेदन करना होगा। आवेदन पत्र के साथ निम्नलिखित सहायता दस्तावेज संलग्न करने होंगे: आयु प्रमाणपत्र, आवास का प्रमाण पत्र, विवाह पंजीकरण प्रमाण पत्र पर और दहेज न लेने की शपथ लेते हुए एक पत्र। फ़ाइल डाउनलोड करने के लिए यहाँ क्लिक करें(फ़ाइल का आकार: 377.93 KB) http://socialwelfare.icdsbih.gov.in/upload/SchemesAndProgrammes/SnP_132919646982.pdf |
बिहार सरकार ने बाल संरक्षण के लिए अतुलनीय कार्य किया, जानें विस्तृत जानकारी
योजनाएं और कार्यक्रम : बाल संरक्षण
| समेकित बाल संरक्षण योजना (आईसीपीएस):समेकित बाल संरक्षण योजना (आईसीपीएस) महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, भारत सरकार की एक विस्तृत योजना है जिसका उद्देश्य देश में बच्चों के लिए एक संरक्षणकारी वातावरण तैयार करना है। यह एक केंद्रीय रूप से प्रायोजित योजना है जो न केवल गलीकूचों और कामकाजी बच्चों के लिए योजना, किशोर न्याय का प्रशासन, आदि जैसी, मंत्रालय की मौजूदा सभी बाल संरक्षण योजनाओं को एक छत्र के अंतर्गत लाती है, बल्कि केंद्रीय बजट में बाल संरक्षण कार्यक्रमों के लिए अधिक आवंटन भी प्रस्तावित करती है। इस योजना का उद्देश्य बच्चों को कार्यक्षम और प्रभावकारी रूप से संरक्षण प्रदान करने वाली व्यवस्था के निर्माण के सरकार/राज्य के दायित्व को पूरा करने में योगदान करना है। यह ''बाल अधिकारों की रक्षा'' और ''बच्चे के सर्वोत्ताम हित'' के आधारभूत सिद्धांतों पर तथा किशोर न्याय (बच्चों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम, 2000, संशोधित अधिनियम, 2006 और उसमें दी गई नियमावली पर आधारित है। यह देखरेख और संरक्षण के ज़रूरतमंद बच्चों और विधि का उल्लंघन करने वाले किशोरों का समग्रतापूर्ण विकास, देखरेख, संरक्षण और उपचार के प्रति बाल-मैत्रीपूर्ण दृष्टिकोण अपनाने पर ध्यान केंद्रित करते हुए किशोर न्याय अधिनियम और उसकी नियमावली को प्रोन्नत करती है। समेकित बाल संरक्षण योजना (आईसीपीएस) के लक्ष्य इस प्रकार हैं: कठिन परिस्थितियों में रहने वाले बच्चों के कल्याण में सुधार हेतु योगदान करना और साथ ही ऐसी असुरक्षाओं, स्थितियों और कार्रवाइयों में कमी लाना जिनकी वजह से बच्चे की उपेक्षा, शोषण और अलगाव जन्म लेते हैं। समेकित बाल संरक्षण योजना का उद्देश्य गुणवत्तापूर्ण बाल संरक्षण सेवाओं में सुधार ला कर; बाल अधिकारों के बारे में जन जागरूकता पैदा करके; बाल संरक्षण के लिए जवाबदेही को लागू करके, आवश्यक सेवाओं का संस्थाकरण करके और वर्तमान ढांचों को मजबूत बना कर; कठिन परिस्थितियों में रहने वाले बच्चों के लिए सांविधिक और सहायता सेवाएं प्रदान करने हेतु सरकार के सभी स्तरों पर कार्यशील ढांचों की स्थापना करके; साक्ष्य-आधारित अनुश्रवण और मूल्यांकन, सभी स्तरों पर क्षमताओं को बढ़ा कर; ज्ञान-आधार का निर्माण करके; और परिवार एवं समुदाय के स्तर पर बाल संरक्षण के कार्य का सुदृढ़ीकरण करके इन लक्ष्यों को प्राप्त करना है। कार्यान्वयन स्थिति। बिहार सरकार ने केंद्र सरकार के साथ 23 अप्रैल 2010 को एक सहमति ज्ञापन हस्ताक्षरित किया है जिसके अनुसार ज्ञापन में निर्धारित प्रावधान दोनों पक्षों के लिए बाध्यकारी होंगे। केंद्र सरकार और राज्य सरकार कार्यान्वयन योजना में निर्धारित निम्न अनुपात में विभिन्न घटकों पर व्यय में साझेदारी करेंगी:
सरकार ने समेकित बाल संरक्षण योजना (आईसीपीएस) के लक्ष्यों और मार्गनिर्देशों के अनुसार संस्थागत कार्यतंत्र और सेवाएं स्थापित करने की प्रक्रिया आरंभ की है। इस समय सभी 38 जिलों में किशोर न्याय बोर्ड मंजूर और स्थापित किये जा चुके हैं जबकि बाल कल्याण समितियां 38 जिलों के लिए मंजूर की गई हैं, पर 21 जिलों में ही इनका गठन किया गया है। देखरेख और संरक्षण के जरूरतमंद बच्चों की संस्थागत देखरेख जरूरतों की पूर्ति के लिए तीन बाल गृह और तीन आश्रय गृह कार्य कर रहे हैं। विधि का उल्लंघन करने वाले बच्चों के लिए 19 प्रेक्षण गृह मंजूर किये गये हैं जिनमें से 10 प्रेक्षण गृह कार्य कर रहे हैं। 18 वर्ष से अधिक आयु के बच्चों के लिए दो देखरेख-पश्चात संगठन संचालित किये जा रहे हैं। इसके अलावा बच्चों की आश्रय संबंधी जरूरतों की पूर्ति के लिए 11 खुले आश्रय मंजूर किये गए हैं। राज्य में दत्तक-ग्रहण को प्रोन्नत करने के लिए तीन विशेषीकृत दत्तक-ग्रहण एजेंसियां कार्य कर रही हैं। स्पांसरशिप और पोषक देखरेख जैसे अन्य गैर-संस्थागत विकल्पों को प्रोन्नत करने के लिए विभाग मार्गनिर्देश तैयार करने हेतु कार्य कर रहा है। राज्य बाल संरक्षण सोसाइटी, जिला बाल संरक्षण सोसाइटियों, राज्य दत्तक-ग्रहण संसाधन एजेंसी और राज्य परियोजना सहायता इकाई जैसी अन्य संस्थाओं का गठन किया गया है। लक्ष्य समूह समेकित बाल संरक्षण योजना (आईसीपीएस) देखरेख और संरक्षण के ज़रूरतमंद बच्चों और विधि का उल्लंघन करने वाले किशोरों पर अपने कार्यकलापों को संकेंद्रित करती है। साथ ही यह योजना अन्य असुरक्षित बच्चों को रोकथामकारी, सांविधिक और देखरेख एवं पुनर्वास सेवाएं प्रदान करती है। इनमें इन वर्गों के बच्चे शामिल हैं: असुरक्षित और जोखिम में पड़े परिवारों के बच्चे; प्रवासी परिवारों, अत्यधिक निर्धनता की हालत में रहने वाले परिवारों के बच्चे, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़े वर्गों के बच्चे; भेदभाव से पीड़ित या प्रभावित परिवारों, अल्पसंख्यक समुदाय के बच्चे या एचआईवी/एड्स से संक्रमित और प्रभावित बच्चे, अनाथ बच्चे, नशीली दवाओं और नशीले पदार्थों का सेवन करने वाले बच्चे, भिक्षावृत्तिा करने वाले बच्चे, यौन रूप से शोषित बच्चे, कैदियों के बच्चे और गलीकूचों में रहने वाले बच्चे। चाइल्डलाइन चाइल्डलाइन एक चौबीसों घंटे की आपात्कालीन फ़ोन सेवा है जिसका मुसीबत में पड़े बच्चे प्रयोग कर सकते हैं। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय का यह कार्यक्रम मुम्बई-आधारित चाइल्डलाइन इंडिया फाउंडेशन द्वारा कार्यान्वित किया जा रहा है। यह सेवा बच्चों को दुराचार और शोषण की स्थितियों से बचाने में मदद करती है और उन्हें आश्रय गृहों, चिकित्सा, परामर्श और पुनर्वास सेवाएं प्रदान करने में मदद करती है। मुसीबत या कठिनाई की स्थितियों में पड़े बच्चे और वयस्क भी 1098 डायल करके यह सेवा प्राप्त कर सकते हैं। भारत सरकार द्वारा 1999 में स्थापित की गई यह सेवा देश के 83 शहरों में कार्य कर रही है। इस सेवा का मुख्य लक्ष्य संकट की स्थिति में पड़े बच्चों की समस्या को हल करना और देखरेख तथा पुनर्वास के लिए उन्हें संबंधित सरकारी और गैर-सरकारी संगठनों के पास भेजना है। यह सेवा बाल कल्याण के क्षेत्र में सरकारी और गैर-सरकारी सेवाओं के बीच नेटवर्किंग करने और बच्चों के पुनर्वास के लिए अस्पताल, पुलिस, रेलवे आदि सहायता सेवाओं को मज़बूती प्रदान करती है। यह पुलिस, न्यायपालिका, अस्पतालों आदि में कार्यरत लोगों को बाल संरक्षण के मुद्दों के बारे में संवेदनशील बनाने हेतु एक मंच का कार्य करती है। इस समय चाइल्डलाइन सेवा राज्य के इन छह शहरों में कार्यरत है: पटना, किशनगंज, दरभंगा, सीतामढ़ी, पुर्णिया और मुज़फ्फरपुर। निम्न सात अन्य ज़िलों में इसका विस्तार करने की योजना बनाई जा रही है: सहरसा, वैशाली, भागलपुर, बक्सर, गया (नगरीय), कटिहार और मोतीहारी (पश्चिमी चंपारन) |
बिहार में जदयू के नेतृत्व में सरकार द्वारा ग्रामीण व शहरी क्षेत्र के विकास का पैमाना
मुख्यमंत्री क्षेत्र विकास योजना’ के तहत राज्य के शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों के विकास हेतु जदयू के नेतृत्व में बिहार राज्य सरकार ने ढेरों सराहनीय कार्य किए हैं। इसका उद्देश्य शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों का संतुलित विकास करना है। यह योजना सभी जिलों में लागू होगी। इसका विवरण इस प्रकार हैः
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