Saturday, 29 November 2014

बिहार सरकार ने बाल संरक्षण के लिए अतुलनीय कार्य किया, जानें विस्तृत जानकारी

योजनाएं और कार्यक्रम : बाल संरक्षण


समेकित बाल संरक्षण योजना (आईसीपीएस):समेकित बाल संरक्षण योजना (आईसीपीएस) महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, भारत सरकार की एक विस्तृत योजना है जिसका उद्देश्य देश में बच्चों के लिए एक संरक्षणकारी वातावरण तैयार करना है। यह एक केंद्रीय रूप से प्रायोजित योजना है जो न केवल गलीकूचों और कामकाजी बच्चों के लिए योजना, किशोर न्याय का प्रशासन, आदि जैसी, मंत्रालय की मौजूदा सभी बाल संरक्षण योजनाओं को एक छत्र के अंतर्गत लाती है, बल्कि केंद्रीय बजट में बाल संरक्षण कार्यक्रमों के लिए अधिक आवंटन भी प्रस्तावित करती है।

इस योजना का उद्देश्य बच्चों को कार्यक्षम और प्रभावकारी रूप से संरक्षण प्रदान करने वाली व्यवस्था के निर्माण के सरकार/राज्य के दायित्व को पूरा करने में योगदान करना है। यह ''बाल अधिकारों की रक्षा'' और ''बच्चे के सर्वोत्ताम हित'' के आधारभूत सिद्धांतों पर तथा किशोर न्याय (बच्चों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम, 2000, संशोधित अधिनियम, 2006 और उसमें दी गई नियमावली पर आधारित है। यह देखरेख और संरक्षण के ज़रूरतमंद बच्चों और विधि का उल्लंघन करने वाले किशोरों का समग्रतापूर्ण विकास, देखरेख, संरक्षण और उपचार के प्रति बाल-मैत्रीपूर्ण दृष्टिकोण अपनाने पर ध्यान केंद्रित करते हुए किशोर न्याय अधिनियम और उसकी नियमावली को प्रोन्नत करती है।

समेकित बाल संरक्षण योजना (आईसीपीएस) के लक्ष्य इस प्रकार हैं: कठिन परिस्थितियों में रहने वाले बच्चों के कल्याण में सुधार हेतु योगदान करना और साथ ही ऐसी असुरक्षाओं, स्थितियों और कार्रवाइयों में कमी लाना जिनकी वजह से बच्चे की उपेक्षा, शोषण और अलगाव जन्म लेते हैं। समेकित बाल संरक्षण योजना का उद्देश्य गुणवत्तापूर्ण बाल संरक्षण सेवाओं में सुधार ला कर; बाल अधिकारों के बारे में जन जागरूकता पैदा करके; बाल संरक्षण के लिए जवाबदेही को लागू करके, आवश्यक सेवाओं का संस्थाकरण करके और वर्तमान ढांचों को मजबूत बना कर; कठिन परिस्थितियों में रहने वाले बच्चों के लिए सांविधिक और सहायता सेवाएं प्रदान करने हेतु सरकार के सभी स्तरों पर कार्यशील ढांचों की स्थापना करके; साक्ष्य-आधारित अनुश्रवण और मूल्यांकन, सभी स्तरों पर क्षमताओं को बढ़ा कर; ज्ञान-आधार का निर्माण करके; और परिवार एवं समुदाय के स्तर पर बाल संरक्षण के कार्य का सुदृढ़ीकरण करके इन लक्ष्यों को प्राप्त करना है।
कार्यान्वयन स्थिति।

बिहार सरकार ने केंद्र सरकार के साथ 23 अप्रैल 2010 को एक सहमति ज्ञापन हस्ताक्षरित किया है जिसके अनुसार ज्ञापन में निर्धारित प्रावधान दोनों पक्षों के लिए बाध्यकारी होंगे। केंद्र सरकार और राज्य सरकार कार्यान्वयन योजना में निर्धारित निम्न अनुपात में विभिन्न घटकों पर व्यय में साझेदारी करेंगी:
  • गैर-सरकारी संगठन की भागीदारी के साथ सभी घटकों के लिए 90:10
  • जेजेबीज, सीडब्ल्यूसीज और गैर-सरकारी संस्थाओं द्वारा संचालित परियोजनाओं के अलावा राज्य में सभी घटकों के लिए 75:25
  • सभी जेजेबीज और सीडब्ल्यूसीज के लिए 35:65
एमडब्ल्यूसीडी ने आईसीपीएस के अंतर्गत वर्ष 2010-11 में राज्य में बाल संरक्षण कार्यतंत्रों को मजबूत बनाने के लिए 604.58 लाख रुपए की राशि मंजूर की थी। राज्य सरकार ने वर्ष 2010-11 में 200.00 लाख रुपए और वर्ष 2011-12 के लिए 939.57 लाख रुपए मंजूर किये हैं।

सरकार ने समेकित बाल संरक्षण योजना (आईसीपीएस) के लक्ष्यों और मार्गनिर्देशों के अनुसार संस्थागत कार्यतंत्र और सेवाएं स्थापित करने की प्रक्रिया आरंभ की है। इस समय सभी 38 जिलों में किशोर न्याय बोर्ड मंजूर और स्थापित किये जा चुके हैं जबकि बाल कल्याण समितियां 38 जिलों के लिए मंजूर की गई हैं, पर 21 जिलों में ही इनका गठन किया गया है। देखरेख और संरक्षण के जरूरतमंद बच्चों की संस्थागत देखरेख जरूरतों की पूर्ति के लिए तीन बाल गृह और तीन आश्रय गृह कार्य कर रहे हैं। विधि का उल्लंघन करने वाले बच्चों के लिए 19 प्रेक्षण गृह मंजूर किये गये हैं जिनमें से 10 प्रेक्षण गृह कार्य कर रहे हैं। 18 वर्ष से अधिक आयु के बच्चों के लिए दो देखरेख-पश्चात संगठन संचालित किये जा रहे हैं। इसके अलावा बच्चों की आश्रय संबंधी जरूरतों की पूर्ति के लिए 11 खुले आश्रय मंजूर किये गए हैं। राज्य में दत्तक-ग्रहण को प्रोन्नत करने के लिए तीन विशेषीकृत दत्तक-ग्रहण एजेंसियां कार्य कर रही हैं। स्पांसरशिप और पोषक देखरेख जैसे अन्य गैर-संस्थागत विकल्पों को प्रोन्नत करने के लिए विभाग मार्गनिर्देश तैयार करने हेतु कार्य कर रहा है। राज्य बाल संरक्षण सोसाइटी, जिला बाल संरक्षण सोसाइटियों, राज्य दत्तक-ग्रहण संसाधन एजेंसी और राज्य परियोजना सहायता इकाई जैसी अन्य संस्थाओं का गठन किया गया  है।

लक्ष्य समूह
समेकित बाल संरक्षण योजना (आईसीपीएस) देखरेख और संरक्षण के ज़रूरतमंद बच्चों और विधि का उल्लंघन करने वाले किशोरों पर अपने कार्यकलापों को संकेंद्रित करती है। साथ ही यह योजना अन्य असुरक्षित बच्चों को रोकथामकारी, सांविधिक और देखरेख एवं पुनर्वास सेवाएं प्रदान करती है। इनमें इन वर्गों के बच्चे शामिल हैं: असुरक्षित और जोखिम में पड़े परिवारों के बच्चे; प्रवासी परिवारों, अत्यधिक निर्धनता की हालत में रहने वाले परिवारों के बच्चे, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़े वर्गों के बच्चे; भेदभाव से पीड़ित या प्रभावित परिवारों, अल्पसंख्यक समुदाय के बच्चे या एचआईवी/एड्स से संक्रमित और प्रभावित बच्चे, अनाथ बच्चे, नशीली दवाओं और नशीले पदार्थों का सेवन करने वाले बच्चे, भिक्षावृत्तिा करने वाले बच्चे, यौन रूप से शोषित बच्चे, कैदियों के बच्चे और गलीकूचों में रहने वाले बच्चे।

चाइल्डलाइन
चाइल्डलाइन एक चौबीसों घंटे की आपात्कालीन फ़ोन सेवा है जिसका मुसीबत में पड़े बच्चे प्रयोग कर सकते हैं। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय का यह कार्यक्रम मुम्बई-आधारित चाइल्डलाइन इंडिया फाउंडेशन द्वारा कार्यान्वित किया जा रहा है। यह सेवा बच्चों को दुराचार और शोषण की स्थितियों से बचाने में मदद करती है और उन्हें आश्रय गृहों, चिकित्सा, परामर्श और पुनर्वास सेवाएं प्रदान करने में मदद करती है।

मुसीबत या कठिनाई की स्थितियों में पड़े बच्चे और वयस्क भी 1098 डायल करके यह सेवा प्राप्त कर सकते हैं। भारत सरकार द्वारा 1999 में स्थापित की गई यह सेवा देश के 83 शहरों में कार्य कर रही है। इस सेवा का मुख्य लक्ष्य संकट की स्थिति में पड़े बच्चों की समस्या को हल करना और देखरेख तथा पुनर्वास के लिए उन्हें संबंधित सरकारी और गैर-सरकारी संगठनों के पास भेजना है। यह सेवा बाल कल्याण के क्षेत्र में सरकारी और गैर-सरकारी सेवाओं के बीच नेटवर्किंग करने और बच्चों के पुनर्वास के लिए अस्पताल, पुलिस, रेलवे आदि सहायता सेवाओं को मज़बूती प्रदान करती है।

यह पुलिस, न्यायपालिका, अस्पतालों आदि में कार्यरत लोगों को बाल संरक्षण के मुद्दों के बारे में संवेदनशील बनाने हेतु एक मंच का कार्य करती है।

इस समय चाइल्डलाइन सेवा राज्य के इन छह शहरों में कार्यरत है: पटना, किशनगंज, दरभंगा, सीतामढ़ी, पुर्णिया और मुज़फ्फरपुर। निम्न सात अन्य ज़िलों में इसका विस्तार करने की योजना बनाई जा रही है: सहरसा, वैशाली, भागलपुर, बक्सर, गया (नगरीय), कटिहार और मोतीहारी (पश्चिमी चंपारन)

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