योजनाएं और कार्यक्रम : बाल संरक्षण
| कामकाजी बच्चों के कल्याण के लिए योजना: इस योजना का उद्देश्य कामकाजी बच्चों को अनौपचारिक शिक्षा और व्यावसायिक प्रशिक्षण के अवसर प्रदान करना है ताकि अगर उन्होंने विद्यालय में पढ़ाई नहीं की या किन्हीं कारणों से पढ़ाई छोड़नी पड़ी है तो वे मुख्य धारा की शिक्षा में प्रविष्ट/पुन: प्रविष्ट हो सकें। यह शहरी क्षेत्रों में ही परियोजनाओं के लिए सहायता प्रदान करती है और श्रम एवं रोजगार मंत्रालय की वर्तमान योजनाओं के कार्यान्वयन वाले क्षेत्रों में परियोजनाओं के लिए सहायता प्रदान नहीं करती। लाभ और पात्रता यह योजना बाल मजदूरों और संभावित बाल मजदूरों के - विशेषकर उनके जिन्हें पारिवारिक सहायता प्राप्त नहीं है, सहायता प्रदान करती है। इनमें निम्न प्रकार के बच्चे शामिल हैं: झोंपड़पट्टियों के बच्चे/फुटपाथ पर रहने वाले/नशीली दवा लेने वाले, रेलवे प्लेटफॉर्म पर रहने वाले/रेलवे लाइनों के पास रहने वाले, दुकानों, ढाबों, मैकेनिक शॉप्स में काम करने वाले, घरेलू काम करने वाले बच्चे, वे बच्चे जिनके मातापिता जेल में हैं, प्रवासियों/यौन कर्मियों, कुष्ठ रोगियों के बच्चे, आदि। इस कार्यक्रम के घटक इस प्रकार हैं: मुख्य धारा की शिक्षा प्रणाली में वापसी; बच्चों के मातापिता, परिवार के सदस्यों और संबंधियों को परामर्श ताकि उनका शोषण न हो; और जहां भी संभव हो व्यावसायिक प्रशिक्षण। यह योजना को स्वैच्छिक क्षेत्र या गैर-सरकारी संस्थाओं के माध्यम से संचालित किया जाता है। इस हेतु संस्थाओं को वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। योजना के मानदंडों के अनुसार मंत्रालय 90 प्रतिशत वित्ताीय सहायता प्रदान करता है और संबंधित संस्था बाकी 10 प्रतिशत व्यय वहन करती है। |

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