Wednesday, 11 March 2015
Tuesday, 10 March 2015
Monday, 9 March 2015
Thursday, 5 March 2015
Wednesday, 4 March 2015
बदहाल किसानों को दिया जाये उचित मुआवजा, कर्ज माफ़ हो
बीते दिनों देश के कई राज्यों में बेमौसम बरसात हुई वहीँ कई जगहों पर ओले भी पड़े जिससे किसान त्राहि त्राहि कर रहे हैं। कई किसानों ने आत्महत्या भी की। खबरों के अनुसार महाराष्ट्र में बारिश की वजह से एक हजार करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान है। पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, गुजरात, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश में भी किसान काफी परेशान हैं। बताया जा रहा है की इस बेमौसम बरसात के कारण देश भर में कुल दस हज़ार करोड़ का नुकसान होने की आशंका है। उत्तर भारत में बेमौसम बरसात से किसानों को भारी नुकसान पहुंचा है। रबी की फसलों की पैदावार पर सबसे ज्यादा असर पड़ा है। खेत में तैयार खड़ी फसल जैसे गेहूं, सरसों, आलू, पोश्ता आदि फसलें तबाह हो गईं। तबाह होने से किसान बर्बादी के कगार पर आ पहुंचा है। वहीँ उत्तर प्रदेश में हुई जोरदार बारिश के साथ ओला गिरने से गेहूं की फसल को व्यापक नुकसान हुआ है। प्रदेश में गेहूं के कुल रकबे की करीब 50 फीसद फसल को बारिश व तेज हवाओं ने सुला दिया। इस बार उम्मीद थी की पैदावार अच्छी होगी लेकिन मौसम की मार ने किसानों की उम्मीदों पर पानी फिर दिया है जिसकी भरपाई नहीं हो सकती लेकिन सरकार यदि चाहे तो किसानों पर से इस बोझ को कम किया जा सकता है जैसा की 2008 में सरकार ने बजट के दौरान किसानों के सारे क़र्ज़ माफ़ करने की घोषणा की थी और आयकर में भी छुट दी थी। मौजूदा फसल बिमा के जो नॉर्म्स हैं की 70% से ज्यादा फसल बर्बाद हो तो मुआवजा मिलता है इस धारा को ख़त्म किया जाये और किसानों का जो क़र्ज़ है उसे अविलम्ब माफ़ किया जाये साथ ही सरकार बैंकों को हिदायत दे की किसानों से ऋण के बारे कुछ न कहें।
Tuesday, 3 March 2015
Saturday, 28 February 2015
इस बजट से बढ़ेगी महंगाई
केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली द्वारा पेश वित्तीय वर्ष 2०15-16 के आम बजट से देश
की आम जनता को निराशा ही हाथ लगी है। बजट में एक तो इनकम टैक्स छूट में कोई बदलाव
नहीं किया गया है, जिससे आम जनता को कोई राहत नहीं मिली है। वहीं कॉरपोरेट को लुभाने
के लिए पहल जरूर की गई है। निस्संदेह इस बजट में न तो किसानों के लिए कुछ विशेष है, न तो बेरोज़गारी को
कम करने के लिए कोई ठोस कदम उठाया गया है। सर्विस कर, कस्टम कर बढ़ाने से
महंगाई बढ़ेगी जो कतई उचित नहीं है। ये बजट गरीब और आम आदमी की आकांक्षाओं के
अनुरूप नहीं है। बजट देश की आम जनता के हिसाब से सोचकर पेश नहीं किया गया है।
ज्यादा निवेश करने पर कर में छूट मिलेगी, इससे तो यही लगता है कि ये बजट
कॉर्पोरेट के हित के लिए है। इसके अलावा मोबाइल, इंटरनेट, कूरियर जैसी कई
जरूरी चीजों की कीमतों में बढ़ोतरी भी हो सकती है।
Friday, 27 February 2015
Thursday, 26 February 2015
रेल बजट में माल भाड़े में बढ़ोतरी से बढ़ेगी महंगाई
रेल मंत्री सुरेश प्रभु द्बारा पेश रेल बजट में माल भाड़े में जिस तरह 1० फीसदी की बढ़ोतरी की गई है, उससे महंगाई बढ़ सकती है। कोयला, सीमेंट, आयरन और स्टील के माल भाड़े में बढ़ोतरी से इनके दाम बढ़ सकते हैं। वहीं, एलपीजी के माल भाड़े में ०.8 फीसदी की, कोयले के मालभाड़े में 6.3 फीसदी, केरोसीन के मालभाड़े में ०.8 फीसदी, स्क्रैप और पिग ऑयरन के मालभाड़े में 3.1 फीसदी, यूरिया के मालभाड़े में 1० फीसदी, सीमेंट के मालभाड़े में 2.7 फीसदी, स्लैग के मालभाड़े में 2.7 फीसदी, अनाज और दालों के मालभाड़े में 1० फीसदी की और ऑयरन-स्टील के मालभाड़े में ०.8 फीसदी की बढ़ोतरी की गई हैं। इन उत्पादों के मालभाड़े में अभी इस तरह बढ़ोतरी नहीं होनी चाहिए थी, क्योंकि जनता पहले से ही महंगाई से त्रस्त रही है।
25/02/2015 : Shri Sharad Yadav alerts government on the issue of labours
श्री शरद यादव मजदूरों की समस्याओं का मुद्दा राज्य सभा में उठाते हुए
Wednesday, 25 February 2015
25/02/2015 : Shri Sharad Yadav historical speech in Rajya Sabha
भूमि अधिग्रहण कानून को लेकर श्री शरद यादव ने कहा, 'किसानों के साथ भेदभाव बर्दाश्त नहीं, केंद्र ने शेर के मुंह में हाथ डाल दिया है’
25/02/2015 : Shri Sharad Yadav asks Home Minister on Tribal issues
श्री शरद यादव राज्य सभा में ट्राइबल की समस्या को लेकर गृह मंत्री का ध्यान आकृष्ट कराते हुए
Tuesday, 24 February 2015
24/02/2015 : Shri Sharad Yadav speaks on the problems of farmers in Rajya Sabha
किसान विरोधी भूमि अधिग्रहण अध्यादेश पर संसद में आवाज़ उठाते हुए श्री शरद यादव
Sunday, 22 February 2015
Friday, 20 February 2015
मंत्रालय से लीक हुई दस्तावेज की उच्चस्तरीय जांच हो
दिल्ली क्राइम ब्रांच की टीम द्वारा पेट्रोलियम मंत्रालय के नीतिगत फैसलों से जुड़े गोपनीय दस्तावेज लीक करने का मामला सामने आया है। यह अत्यंत ही निंदनीय है और इस मामले की गंभीरता और जिम्मेदारी से जांच होनी चाहिए जिससे की बड़ी मछलियाँ भी पकड़ी जायें और केवल छोटे लोगों पर गाज न गिरे।
बिहार में बेनकाब हुई बीजेपी!
बिहार में जो हम कह रहे थे वह श्री मांझी के
स्तीफे से साबित हो गया है। राज्य में जो राजनितिक अस्थिरता का माहौल बीजेपी के इशारे पर चल
रहा था वो आज ख़त्म हुआ है। इसके लिए मैं बिहार की जनता को बधाई देता हूँ। मैं और
हमारी पार्टी जनता दल यूनाइटेड सदैव दलितों, महादलितों, पिछड़ों, श्रमिकों और सामाजिक
रूप से उपेक्षितों के हक के लिए आवाज उठाती रही है। ये पार्टी है राम मनोहर लोहिया,
कर्पूरी ठाकुर, जय प्रकाश नारायण, चौधरी चरण सिंह और मधु लिमये जैसे महानायकों की जिनपर कोई
ऊँगली भी नहीं उठा सकता। बिहार में जनता दल यूनाइटेड की छवि को धूमिल करना ही बीजेपी
की नियत थी जिससे अब पर्दा उठ चूका है और ये स्पष्ट हो गया है कि जो कुछ भी हुआ वह
नकारात्मक राजनीती से प्रेरित था।
Thursday, 19 February 2015
Monday, 16 February 2015
खाद्य कीमतें बढ़ीं
खाद्य कीमतों में तेजी आई है। जबकि डीजल, पेट्रोल के दाम
लगातार कम होते रहे हैं मगर नागरिकों को सब्जियों तथा अन्य खाद्य पदार्थों की
कीमतों में कोई राहत नहीं मिली है। कहा जाता था कि महंगाई का मूल कारण पेट्रोल और
डीजल की बढती कीमतों पर निर्भर करता है मगर अब तो पेट्रोल और डीजल के दाम कम होते
हुए भी महंगाई लगातार बढ़ रही है। महंगाई को रोकने में यह सरकार अभी तक विफल रही है।
Sunday, 15 February 2015
Friday, 13 February 2015
Thursday, 12 February 2015
Wednesday, 11 February 2015
Tuesday, 10 February 2015
Wednesday, 4 February 2015
गरीबों व आम जनता के साथ अन्याय कर रही ये सरकार
‘इंडियन एक्सप्रेस’ न्यूज़पेपर में मनरेगा पर छपी एक रिपोर्ट से काफी दुख हुआ। केंद्र सरकार की ओर से इस योजना के प्रति राजनीतिक जोड़-तोड़ दिखाकर अनदेखी करना, गरीबों के साथ घोर अन्याय है। राजनीति करना, शासन चलाना तो अच्छी बात है, लेकिन ये सारी चीजें तब और अच्छी लगती हैं, जब हम गरीब, आम जनता और देश का भला सोचकर करते हैं। ऐसी राजनीति को विनाशक ही माना जाए, जिसमें गरीबों के साथ छल हो, धोखा हो। पूर्ववर्ती सरकार में ‘100 दिन रोज़गार’ के मद्देनज़र जो योजना चल रही थी, मौजूदा केंद्र सरकार ने उसे केवल तीन फीसदी लोगों को लाभ देकर ही समेट दिया है। यह गरीब और बेरोज़गार के साथ धोखा नहीं तो और क्या है? आप चुनाव में बड़े-बड़े वादे करते हैं और धरातल पर देश की जनता को इस तरह की पीड़ा देते हैं। मैं इसकी निंदा करता हूं। आप भी पढ़िए इस पूरी रिपोर्ट को...
Tuesday, 3 February 2015
Monday, 2 February 2015
Sunday, 1 February 2015
Shri Sharad Yadav speaks on the issue of naxalism
To tackle naxalism poverty must be eradicated and employment opportunities must be created...
Saturday, 31 January 2015
Thursday, 29 January 2015
70 फीसदी से अधिक नरेगा मजदूरी बकाया, अविलंब भुगतान करे सरकार
हाल में ग्रामीण विकास मंत्रालय की ओर
से एक आंकड़ा आया है जिसमें बताया गया है कि एनडीए सरकार के शासनकाल में इस वित्तीय
वर्ष के दौरान 70 फीसदी से अधिक नरेगा मजदूरी का
भुगतान नहीं हुआ है। इसी महीने ग्रामीण विकास मंत्रालय
द्बारा इस योजना की एक आंतरिक समीक्षा बैठक के पहले पेश किए गए एक आंकड़े के अनुसार, निर्धारित की गई
रकम से केवल 28.22 फीसदी ही भुगतान हुआ। वहीं मंत्रालय
की लापरवाही की वजह से 15
दिसंबर 2014 तक यह आंकड़ा 72 फीसदी तक पहुंच
गया। रिपोर्ट में तो यह भी बताया गया है कि 90 दिनों के बाद करीब
9 फीसदी का ही भुगतान हुआ। केंद्र सरकार को मजदूरों के साथ कम से
कम इस तरह का व्यवहार नहीं करना चाहिए। मनरेगा के अंतर्गत जो वर्ष में 100 दिन रोजगार का वादा किया गया था, उसके साथ किसी तरह
की अनदेखी इस देश की गरीब जनता के साथ धोखा है। इसे देखकर यह लगता है कि यह सरकार
गरीबों की हितैषी है ही नहीं।
Wednesday, 28 January 2015
अमेरिकी राष्ट्रपति के मंतव्य से सीख ले सरकार
बहुत ख़ुशी की बात है कि अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा का तीन दिवसीय कार्यक्रम भारत में हुआ. लोगों ने फील गुड तो किया लेकिन इंडिया शाइनिंग का सारा मामला डॉउटफुल सा लगता है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने धार्मिक सहिष्णुता को लेकर जिस तरह आगाह किया है, उससे सत्तासीन सरकार को सीख लेनी चाहिए। जाते जाते ओबामा हकीकत बयां कर गए और उन्होंने साफ कहा कि रिलिजियस टॉलरेंस के बिना किसी देश का विकास संभव नहीं है, इस पर हर हाल में अमल होना चाहिए।
Tuesday, 27 January 2015
गणतंत्र दिवस के फॉर्मेट को बदलना चाहिए : शरद यादव
मैंने मीडिया में पढ़ा और देखा कि गणतंत्र दिवस के अवसर पर किस तरह से कई राज्यों की झांकी आदि दिखाने में पक्षपात हुआ। मेरा मानना है कि गणतंत्र दिवस के फॉर्मेट को बदलना चाहिए जो कि सालो साल से वही चलता आ रहा है। हम अपने संविधान के प्रति किस तरह से युवाओं की रूचि इसमें ला सकते हैं और कैसे उसमे कुछ मनोरंजन का रूप देकर दिखाया जा सकता है उसपर सोचना चाहिए।
हमें बाबा अम्बेडकर को याद करते हुए उनकी जीवनी पर कुछ रोमांचक तथ्य देकर जनता को दिखाना चाहिए। मेरा मानना है कि गणतंत्र दिवस समारोह के अवसर पर इतना खर्च होता है उसे बचाया जा सकता है। हमें ऐसे कदम उठाने चाहिए कि इस समारोह पर कम खर्च करके देश के संविधान के बारे में जागरूकता बढ़ाई जा सके।
हमें बाबा अम्बेडकर को याद करते हुए उनकी जीवनी पर कुछ रोमांचक तथ्य देकर जनता को दिखाना चाहिए। मेरा मानना है कि गणतंत्र दिवस समारोह के अवसर पर इतना खर्च होता है उसे बचाया जा सकता है। हमें ऐसे कदम उठाने चाहिए कि इस समारोह पर कम खर्च करके देश के संविधान के बारे में जागरूकता बढ़ाई जा सके।
Monday, 26 January 2015
समाज को सच का आइना दिखाने वाले नायक थे आर. के. लक्ष्मण
रासीपुरम कृष्णस्वामी लक्ष्मण के निधन की खबर सुनकर मुझे अत्यंत पीड़ा
हुई।
देश ने आज एक अनमोल रत्न खो दिया है। आर. के. लक्ष्मण भारत के न
सिर्फ एक प्रमुख व्यंग-चित्रकार थे, बल्कि वो आम आदमी की पीड़ा को अपनी
कूची से गढ़कर, अपने चित्रों से वे पिछले
अर्द्धशती से लोगों को बताते आ रहे थे। समाज की विकृतियों, राजनीतिक विदूषकों और उनकी
विचारधारा के विषमताओं पर भी उन्होंने तीख़े ब्रश चलाये और लोगों को जागरूक करते
रहे। आर. के. लक्ष्मण को उनके
योगदान के लिए कई अवार्ड्स भी मिले। लक्ष्मण सबसे ज़यादा अपने कॉमिक स्ट्रिप
"द कॉमन मैन" जो उन्होंने द टाईम्स ऑफ़ इंडिया में लिखा था, के लिए प्रसिद्ध हुए। मैं इस महान
चित्रकार को नमन करता हूं और प्रार्थना करता हूं कि उन्हें सद्गति प्राप्त हो। साथ
ही शोक संतप्त परिवार एवं तमाम देशवाशियों को इस पीड़ा को सहन करने की शक्ति मिले।
Sunday, 25 January 2015
Saturday, 24 January 2015
Friday, 23 January 2015
Thursday, 22 January 2015
Wednesday, 21 January 2015
देशहित में नहीं एयरपोर्टस निजीकरण
सरकार निजीकरण का ऐसा पासा फेंक रही है जिसे देशहित में कतई नहीं कहा जा सकता। फिलहाल एयरपोर्टस निजीकरण का मसला गंभीर है। हमने कई बार इस पर आपत्ति जताई है। सरकार की इन नीतियों पर विरोध भी शुरू हो चुका है। सबको पता चल गया है कि सरकार इन हालात में निजी व विदेशी निवेश लाने का मंसूबा तैयार कर रही है। सरकार के निजीकरण प्रयासों को लेकर रेल यूनियनों का विरोध तो था ही, अब हवाई अड्डों के निजीकरण के खिलाफ भी कई यूनियनों ने इसका विरोध कर दिया है। एयरपोर्ट अथारिटी एंप्लाईज यूनियन ने चार हवाई अड्डों के निजीकरण के खिलाफ सरकार को हड़ताल की चेतावनी दी है। जिनमें कोलकाता, चेन्नई, जयपुर और अहमदाबाद हवाई अड्डे शामिल हैं।
जनता के पैसे से इतने बढ़िया एयरपोर्ट बनाने और अनुभव हासिल करने के बाद एयरपोर्ट अथारिटी के हवाई अड्डों को बेहतर प्रबंधन के नाम पर निजी कंपनियों के हवाले करना न तो जनता और न ही कर्मचारियों के हित में हो सकता है। वैसे भी कोलकाता व चेन्नई एयरपोर्ट पर अथारिटी के 4००० कर्मचारी तैनात हैं। उनका क्या होगा?
जनता के पैसे से इतने बढ़िया एयरपोर्ट बनाने और अनुभव हासिल करने के बाद एयरपोर्ट अथारिटी के हवाई अड्डों को बेहतर प्रबंधन के नाम पर निजी कंपनियों के हवाले करना न तो जनता और न ही कर्मचारियों के हित में हो सकता है। वैसे भी कोलकाता व चेन्नई एयरपोर्ट पर अथारिटी के 4००० कर्मचारी तैनात हैं। उनका क्या होगा?
सरकार अपनी योजनाओं का भार जनता पर न डाले
जिसका डर था, वही होने लगा है। केंद्र सरकार ने अपनी योजनाओं के लिए जनता पर भार डालना शुरू कर दिया है। सरकार अपनी योजनाओं के अभियानों के लिये कोष जुटाने हेतु दूरसंचार सेवाओं पर उपकर लगाने पर विचार कर रही है। अगर ऐसा हुआ तो फोन और इंटरनेट के बिलों में बढ़ोतरी हो सकती है। यह देशहित में नहीं है और मैं इस पर आपत्ति जताता हूं। सरकार अगर अपनी योजनाओं को लेकर काम कर रही है तो इसका असर जनता की जेब पर क्यों पड़े। इंटरनेट यूज करने वालों में अधिकतर छात्र हैं जो रोजमर्रा के पाठ्यक्रम के लिए भी इंटरनेट का इस्तेमाल करते हैं। अगर इंटरनेट के बिल पर असर पड़ेगा तो एक छात्र इसका वहन कैसे कर पाएगा। केंद्र सरकार को इस पर गंभीरता से विचार करना चाहिए और ऐसे किसी प्रस्ताव को क्रियान्वयन में लाने से पहले मंथन करना चाहिए।
Saturday, 17 January 2015
पेट्रोल की कीमत पर जनता के साथ धोखा बर्दाश्त नहीं
अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार में जिस तरह कच्चा तेल प्रति बैरल कम होता जा रहा है, उस हिसाब से सरकार ने पेट्रोल की कीमत को कम नहीं किया है. केंद्र सरकार को अभी जनता को राहत देनी थी, जो मुमकिन था, लेकिन सरकार ने उत्पाद शुल्क में बढ़ोतरी कर जनता को इस लाभ से महरूम कर दिया. अगर सरकार ऐसा नहीं करती तो पेट्रोल की कीमत साढ़े चार रुपये तक और डीजल की कीमत सवा चार रुपये तक सस्ती होती. ऐसा पहली बार नहीं है जब सरकार ने उत्पाद शुल्क बढ़ाया हो. केवल इस एनडीए सरकार के इस बार सत्ता में आने के बाद से, नवम्बर 2014 से अब तक के दौरान चार बार उत्पाद शुल्क बढ़ाया जा चुका है.
Friday, 16 January 2015
सेंसर बोर्ड प्रकरण की हो जाँच !
सेंसर बोर्ड की चेयरपर्सन का मुद्दा हमारे सामने आया है। यह इस बात
को दर्शाता है कि सेंसर बोर्ड की किस तरह से अनदेखी हो रही है। विवादस्पद फिल्म
मैसेंजर ऑफ़ गॉड को फिल्म प्रमाणन अपीलीय न्यायाधिकरण ने हरी झंडी दे दी जिसकी मैं
घोर निंदा करता हूँ क्यूंकि जब 'सेंसर बोर्ड एक आजाद संस्था है और जब उसने इसकी इजाजत नहीं दी थी तो
ऐसा करना कतई जायज नहीं माना जा सकता क्यूंकि इससे न सिर्फ सेंसर बोर्ड कि
स्वाधीनता पर सवाल खड़ा होता है बल्कि इस तरह कि फिल्मों से देश में हालात
बिगड़ते हैं। सेंसर बोर्ड प्रमुख ने जिस तरह से इसपर नाराजगी जताई है वह जायज है और
मैं उनके द्वारा लिए गए स्तीफे के फैसले का स्वागत करता हूँ. डेरा सच्चा सौदा
प्रमुख बाबा राम रहीम की फिल्म ‘द मैसेंजर ऑफ गॉड' के रिलीज
को लेकर केंद्र द्वारा दबाव बनाए जाने का मैं पुरजोर विरोध करता हूँ क्यूंकि जिस
तरह से शुक्रवार को सेंसर बोर्ड की एक अन्य सदस्य इरा भास्कर ने भी इस्तीफा दिया
वह दुर्भाग्यपूर्ण है। सरकार को यह समझना चाहिए कि फिल्म के प्रदर्शन को लेकर जब
पंजाब और हरियाणा में प्रदर्शन भी हुए तो ऐसे फिल्म को हरी झंडी कैसे दी जा सकती
है? जब सैमसन ने कहा था कि सेंसर बोर्ड की ओर से लिखित तौर पर इस फिल्म
को रिलीज करने की अनुमति अभी तक नहीं दी गई है तो फिर ऐसे फिल्म को कैसे रिलीज़
करने की अनुमति दी गयी। साथ ही साथ लीला सैमसन द्वारा लगाए गए भ्रष्टाचार के आरोप
कि भी जांच होनी चाहिए। इसके अलावा आम तौर पर जब ट्रिब्यूनल 15 से 30 दिन में फिल्म की रिलीज पर फैसला लेता है तो ऐसे में 'मैसेंजर ऑफ गॉड' को 24 घंटे में कैसे अनुमति मिल गई इसकी भी जांच होनी चाहिए।
Thursday, 15 January 2015
निराश्रितों के लिए क्यों नहीं कुछ कर रही सरकार?
दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा
बार-बार रैनबसेरों की स्थिति को सुविधाजनक बनाने के निर्देश के बाद भी सरकार
द्वारा वो पहल नहीं हुई, जिसकी गुंजाइश मुमकिन थी। दिल्ली अरबन शेल्टर इम्प्रूवमेंट बोर्ड ने
हाल में कहा है कि कई लोग हैं जो निराश्रित और गृहविहिन हैं, लेकिन रैनबसेरों में नहीं
रहते हैं। दुखद पहलू ये है कि ऐसे भटक रहे लोग नशे के शिकार हो रहे हैं। आंकड़े पर
गौर करें तो गृहविहिन लोगों में 4० फीसदी लोग आज नशे की लत में फंस चुके हैं। यही नहीं, झुग्गियों में रहने वाले
भी अधिकांश लोगों को नशे के जंजाल में फंसते देखा गया है। नशे से देश को अगर मुक्त
करना है तो जागरुकता कार्यक्रमों को आयोजित करवाना होगा। ऐसे गृहविहिन लोगों की
पहचान करनी होगी और उन्हें इससे बाहर निकलने की प्रेरणा दी जानी चाहिए, अगर इस पर अविलंब अमल नहीं
हुआ तो नशे की जद में और भी लोग पड़ते चले जाएंगे।
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