जिसका डर था, वही होने लगा है। केंद्र सरकार ने अपनी योजनाओं के लिए जनता पर भार डालना शुरू कर दिया है। सरकार अपनी योजनाओं के अभियानों के लिये कोष जुटाने हेतु दूरसंचार सेवाओं पर उपकर लगाने पर विचार कर रही है। अगर ऐसा हुआ तो फोन और इंटरनेट के बिलों में बढ़ोतरी हो सकती है। यह देशहित में नहीं है और मैं इस पर आपत्ति जताता हूं। सरकार अगर अपनी योजनाओं को लेकर काम कर रही है तो इसका असर जनता की जेब पर क्यों पड़े। इंटरनेट यूज करने वालों में अधिकतर छात्र हैं जो रोजमर्रा के पाठ्यक्रम के लिए भी इंटरनेट का इस्तेमाल करते हैं। अगर इंटरनेट के बिल पर असर पड़ेगा तो एक छात्र इसका वहन कैसे कर पाएगा। केंद्र सरकार को इस पर गंभीरता से विचार करना चाहिए और ऐसे किसी प्रस्ताव को क्रियान्वयन में लाने से पहले मंथन करना चाहिए।
Wednesday, 21 January 2015
सरकार अपनी योजनाओं का भार जनता पर न डाले
जिसका डर था, वही होने लगा है। केंद्र सरकार ने अपनी योजनाओं के लिए जनता पर भार डालना शुरू कर दिया है। सरकार अपनी योजनाओं के अभियानों के लिये कोष जुटाने हेतु दूरसंचार सेवाओं पर उपकर लगाने पर विचार कर रही है। अगर ऐसा हुआ तो फोन और इंटरनेट के बिलों में बढ़ोतरी हो सकती है। यह देशहित में नहीं है और मैं इस पर आपत्ति जताता हूं। सरकार अगर अपनी योजनाओं को लेकर काम कर रही है तो इसका असर जनता की जेब पर क्यों पड़े। इंटरनेट यूज करने वालों में अधिकतर छात्र हैं जो रोजमर्रा के पाठ्यक्रम के लिए भी इंटरनेट का इस्तेमाल करते हैं। अगर इंटरनेट के बिल पर असर पड़ेगा तो एक छात्र इसका वहन कैसे कर पाएगा। केंद्र सरकार को इस पर गंभीरता से विचार करना चाहिए और ऐसे किसी प्रस्ताव को क्रियान्वयन में लाने से पहले मंथन करना चाहिए।
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