सरकार निजीकरण का ऐसा पासा फेंक रही है जिसे देशहित में कतई नहीं कहा जा सकता। फिलहाल एयरपोर्टस निजीकरण का मसला गंभीर है। हमने कई बार इस पर आपत्ति जताई है। सरकार की इन नीतियों पर विरोध भी शुरू हो चुका है। सबको पता चल गया है कि सरकार इन हालात में निजी व विदेशी निवेश लाने का मंसूबा तैयार कर रही है। सरकार के निजीकरण प्रयासों को लेकर रेल यूनियनों का विरोध तो था ही, अब हवाई अड्डों के निजीकरण के खिलाफ भी कई यूनियनों ने इसका विरोध कर दिया है। एयरपोर्ट अथारिटी एंप्लाईज यूनियन ने चार हवाई अड्डों के निजीकरण के खिलाफ सरकार को हड़ताल की चेतावनी दी है। जिनमें कोलकाता, चेन्नई, जयपुर और अहमदाबाद हवाई अड्डे शामिल हैं।
जनता के पैसे से इतने बढ़िया एयरपोर्ट बनाने और अनुभव हासिल करने के बाद एयरपोर्ट अथारिटी के हवाई अड्डों को बेहतर प्रबंधन के नाम पर निजी कंपनियों के हवाले करना न तो जनता और न ही कर्मचारियों के हित में हो सकता है। वैसे भी कोलकाता व चेन्नई एयरपोर्ट पर अथारिटी के 4००० कर्मचारी तैनात हैं। उनका क्या होगा?
जनता के पैसे से इतने बढ़िया एयरपोर्ट बनाने और अनुभव हासिल करने के बाद एयरपोर्ट अथारिटी के हवाई अड्डों को बेहतर प्रबंधन के नाम पर निजी कंपनियों के हवाले करना न तो जनता और न ही कर्मचारियों के हित में हो सकता है। वैसे भी कोलकाता व चेन्नई एयरपोर्ट पर अथारिटी के 4००० कर्मचारी तैनात हैं। उनका क्या होगा?

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