दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा
बार-बार रैनबसेरों की स्थिति को सुविधाजनक बनाने के निर्देश के बाद भी सरकार
द्वारा वो पहल नहीं हुई, जिसकी गुंजाइश मुमकिन थी। दिल्ली अरबन शेल्टर इम्प्रूवमेंट बोर्ड ने
हाल में कहा है कि कई लोग हैं जो निराश्रित और गृहविहिन हैं, लेकिन रैनबसेरों में नहीं
रहते हैं। दुखद पहलू ये है कि ऐसे भटक रहे लोग नशे के शिकार हो रहे हैं। आंकड़े पर
गौर करें तो गृहविहिन लोगों में 4० फीसदी लोग आज नशे की लत में फंस चुके हैं। यही नहीं, झुग्गियों में रहने वाले
भी अधिकांश लोगों को नशे के जंजाल में फंसते देखा गया है। नशे से देश को अगर मुक्त
करना है तो जागरुकता कार्यक्रमों को आयोजित करवाना होगा। ऐसे गृहविहिन लोगों की
पहचान करनी होगी और उन्हें इससे बाहर निकलने की प्रेरणा दी जानी चाहिए, अगर इस पर अविलंब अमल नहीं
हुआ तो नशे की जद में और भी लोग पड़ते चले जाएंगे।

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