किसानों की सुध नहीं ले रही सरकार

2014 लोक सभा चुनाव के दौरान किसानों से जितने वादे किए गए थे, वो आज हवा-हवाई साबित हो रहे हैं। काला धन लाकर हर गरीब और किसान के खाते में 15- 20 लाख रूपए डालने का वादा करने वाली इस सरकार के पास अब कोई जवाब नहीं है । हालात यह हैं कि इस बीजेपी सरकार के राज में किसानों को आज खाद तक मुहैय्या नहीं करायी जा रही है। कई किसानों से शिकायत आई है कि जहां प्रति एकड़ ज़मीन के लिए 2 बोरी यूरिया की जरूरत है, वहां 10 एकड़ पर भी दो बोरी मिलना नदारद हो गया है । अखबारों में हर दिन रिपोर्ट छपती है कि इन मसलों में कालाबाजारी की समस्याएं आ रही हैं। दलालों का बोलबारला हो रहा है, लेकिन सरकार इनकी सुध लेने को तैयार नहीं है। धान का मूल्य जो किसानों को पिछले साल 4200 रूपए प्रति क्विंटल मिला था आज उन्हें सिर्फ 1700 रूपए क्विंटल ही मिल पा रहा है. इस नुक्सान की भरपाई पर सरकार का कोई ध्यान नहीं है. सरकार का ध्यान तो बस बड़े-बड़े पूंजीपतियों पर ही केन्द्रित है। हाल ही में सरकार को जब गेहूं के समर्थन मूल्य को दोगुना करना था, तो उसे केवल 50 रुपए ही बढ़ाया गया, जिसकी आलोचना देशभर के किसानों ने की। इस कृषि प्रधान देश में किसानों की अनदेखी का मतलब है- राष्ट्र की अर्थव्यवस्था का चौपट हो जाना। अगर इसी तरह किसानों की अनदेखी होती रही तो हम इसके लिए भी आंदोलन करने से पीछे नहीं हटेंगे।
No comments:
Post a Comment