Wednesday, 14 January 2015

केंद्र सरकार पहले इस देश की शिक्षा व्यवस्था को सुधारे


यह काफी दुखद है कि आज देश की बुनियादी शिक्षा व्यवस्था दिन-ब-दिन बिगड़ती जा रही है। एनुअल स्टेटस ऑफ एजुकेशन रिपोर्ट बताती है कि छह वर्ष से 14 वर्ष तक की शिक्षा का हाल देश में चिंताजनक है। सर्वे के मुताबिक, कक्षा आठ में पढ़ने वाले 25 फीसदी बच्चे कक्षा दो की टेक्स्ट बुक को पढ़ने में आज असमर्थ हैं। 2०14 के आखिर तक कक्षा पांच में पढ़ने वाले केवल 48.1 फीसदी बच्चे ही क्लास दो की टेक्स्ट पुस्तक को पढ़ पाने में समर्थ हुए। यह अपने आप में बताने के लिए काफी है कि देश में शिक्षा व्यवस्था का क्या हाल है। केंद्र सरकार को चाहिए कि अविलंब इस पर गौर करे। बच्चे इस देश के भविष्य हैं, अगर बुनियाद ही खराब होगी तो हमारे देश का भविष्य कभी उज्जवल नहीं हो सकता। केवल बातों से अच्छे दिन नहीं आएंगे, अच्छे दिन लाने के लिए धरातल पर काम करने चाहिए। 

2 comments:

  1. महोदय अभी तक केन्द्र मे जो भी सरकार रही है - देश को बीस नहीं दस ही समझ कर काम की है - संविधान के मूल भावना के खिलाफ - सत्ता मे दस का ही कब्जा है जो जब भी भागीदारी/आजादी(रिजर्वेशन) की बात आती है ,तब शिक्षा पे जोड़ देने की बात करते है - जरा ये देखिये इनकी करतूत
    ---
    भारत के संविधान में राज्य के नीति निर्देसक तत्व
    (Directive Principle of State Policy) में स्पस्ट लिखा था - भारत सरकार 10
    साल के अंदर
    , 6 से 14
    वर्ष के बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा की व्यवस्था सुनिश्चित करेगी। क्या हुआ ?
    उलटे सरकारी विश्वविद्यालय और महाविद्यालय को बर्बाद करके रख दी है ,
    1950 से 2014 तक अापको कौन रोका था - शिक्षा पे जोड़ देने से ? बजट देखिये
    1950 से 2014 तक. भारत सरकार कैसे पटना यूनिवर्सिटी , बिहार यूनिवर्सिटी सरीखे देश के उत्कृष्ट यूनिवर्सिटी को बर्बाद की है। आज तो शिक्षा मौलिक अधिकार है( आर्टिकल 21 ए) फिर भी भारत सरकार शिक्षा व्यवस्था को बर्बाद करने पे तुली है।

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  2. मै आपको ध्यान दिलाना चाहता हूँ- राज्य के सरकारी नियोजित शिक्षको का बुरा हाल है - वजह केंद्र सरकार का शोषण युक्त काला कानून - जो ठेका बहाली और नियत वेतन/ मानदेय पे काम कराने को मान्यता देता है।
    भारत सरकार शिक्षा पर केंद्रीय बजट बढ़ायेऔर राज्य सरकार को शिक्षा पे खर्च करने के लिए पैसा दे और अविलंब ठेका बहाली
    (Contract /Adhoc) पे रोक लगाये। वर्तमान में
    GDP का 3-4 % हिस्सा ही शिक्षा पे खर्च होता है, कमसे कम 10 -12 % खर्च करे- मोदी जी तो GDP का 20 % हिस्सा शिक्षा पे खर्च करने की बात कहे थे।

    शिक्षा मूल अधिकार है [आर्टिकल 21A] - गुजरात जिसकी चर्चा के बिना विकाश का परिचर्चा समाप्त नहीं होता है - उसी का हाल सुप्रीम कोर्ट की जुबानी:
    In a stinging criticism a bench of justices BS Chauhan and
    Dipak Misra asked the Gujarat government to explain why full time teachers were
    not being recruited even after the Right to Education Act. Calling vidya
    sahayak as Shikha shatrus (enemies of education), the court asked the Modi
    government to reply by Wednesday. The court also asked the government to
    explain why vidya sahayaks were being paid just Rs 2,500.How do you bring such
    policies when there is Article 21A? It is shocking. There are such appointments
    in UP also. [from IBNlive[dot]in[dot]com]

    कोई नेता एक जाती विशेष की राजनीती कर कभी भी बड़ा नेता नही बन सकता है - सुदेश महतो जी इसके उदाहरण है। बड़ा नेता बनने के लिए जमात की राजनीती करनी परती है .

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