मुझे इस बात का डर है कि केंद्र की योजना कहीं जनता पर भारी न पड़ जाए। उद्योग संघ पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एवं उद्योग और क्रिसिल रेटिग ने एक शोध-पत्र जारी किया है। कहा गया है कि 'मेक इन इंडिया' परियोजना को बढ़ावा देने और 7-8 फीसदी विकास दर हासिल करने के लिए आने वाले पांच सालों के दौरान भारत को अपनी सभी इन्फ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में 26 हजार अरब रुपये की आवश्यकता होगी।
यह इसलिए है क्योंकि आज भी देश की गरीब जनता अपनी मूलभूत समस्याओं से जूझ रही है। गांवों के इस देश में गरीब जनता के लिए सबसे पहले भोजन, वस्त्र और आवास की व्यवस्था की जानी चाहिए। यहां देश परेशानियों से जूझ रहा है और इस सरकार के नुमाइंदे हजारों-अरबों रुपए को शहरीकरण जैसी योजनाओं पर खर्च करने की बात कर रहे हैं, यह ठीक नहीं है। शहरीकरण भी जरूरी है, वो तब है जब देश की आम जनता को मुलभुत सुविधाएं मुहय्या हों। सरकार जिस भी योजना को लाए, लेकिन जनता पर इसका बोझ कतई नहीं पड़ना चाहिए।
यह इसलिए है क्योंकि आज भी देश की गरीब जनता अपनी मूलभूत समस्याओं से जूझ रही है। गांवों के इस देश में गरीब जनता के लिए सबसे पहले भोजन, वस्त्र और आवास की व्यवस्था की जानी चाहिए। यहां देश परेशानियों से जूझ रहा है और इस सरकार के नुमाइंदे हजारों-अरबों रुपए को शहरीकरण जैसी योजनाओं पर खर्च करने की बात कर रहे हैं, यह ठीक नहीं है। शहरीकरण भी जरूरी है, वो तब है जब देश की आम जनता को मुलभुत सुविधाएं मुहय्या हों। सरकार जिस भी योजना को लाए, लेकिन जनता पर इसका बोझ कतई नहीं पड़ना चाहिए।

ReplyDeleteपढि़ए एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी की नजर से संसद का बदलता चरित्र -27 सालों से देख रहे हैं संसद की कार्यवाही
http://ghaghrariver.blogspot.in/